इस दिनों सांसद गणेश सिंह के भाई उमेश सिंह लाला की गुण्डागर्दी चरम पर है. पूर्व में भी अपने सांसद भाई के नाम पर हीलहुज्जत के लिये बदनाम उमेश सिंह लाला जनपद सदस्य रामपुर बाघेलान बनने के बाद और ही बेकाबू हो गये हैं. इसका परिणाम है कि वे अपने को अब भाजपा का भगवान तक कहने लगे हैं. इसी का नतीजा है कि अभी हाल ही में उनका विवाद अपनी ही पार्टी के अरविंद सिंह पप्पू से हो गया है. विवाद बहस तक न होकर गालीगलौज तक पहुंच चुका है. लेकिन मजे की बात तो यह रही कि अरविंद सिंह ने यह बाते रिकार्ड कर ली हैं जिसमें लाला न केवल सांसद से भाई होने की धौस दे रहा है वरन सांसद के प्रदेश स्तर के पद को लेकर भी चेता रहा है. हालांकि इस मामले में छत्रपाल सिंह छत्तू ने अरविंद की ओर से लाला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. चर्चा है कि यह मामला प्रदेश स्तर तक जा रहा है. लाला की इन दिनों बढ़ रही गुण्डागर्दी के चलते सांसद की इमेज का ग्राफ बड़ी तेजी से नीचे गिर रहा है. उनके साथ भी वही स्थितियां बन रही हैं जो कभी विधायक शंकरलाल जी की उनके पुत्र राजा के कारण बनी थी.
पेश है लाला की गुण्डागर्दी का नमूना
Friday, April 30, 2010
Tuesday, April 20, 2010
रीवा कलेक्टर का तबादला सतना को अभयदान
कलेक्टर सतना को उनके एक साल में किये गये कामों और शासन व सत्ता के बीच बेहतर समन्वय का ईनाम आखिर जारी तबादला सूची में मिल गया है. इसमें तमाम कयासों के बीच आखिर सतना कलेक्टर का नाम नहीं है और यही अपनी सेवाएं देंगे.
30244795-posting-200410
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Monday, April 19, 2010
अधिकारी का महिला कर्मी के साथ दौरा
Wednesday, April 14, 2010
पूर्व एसपी पाराशर भारी पड़ रहे यादव पर
सतना शहर वासियों को इन दिनों पुलिस महकमें की हलचल कुछ ज्यादा देखने को मिल रही है तथा हमेशा आंख बंद कर के अपराध क्षेत्र से गुजर जाने वाले पुलिस कर्मचारी ताबड़तोड़ छापेमारी में जुट गये है. यही वजह है कि दो दिन पहले शहर के ज्यादातर शराबखानों में छापे डाले गये तो जुआरियों व सटोरियों पर भी निगाहें टेढ़ी कर ली गई है. लेकिन यह रवैया पुलिस का बदला कैसा इसकी भी कहानी कुछ कम नहीं है. दरअसल यह सब हुआ है महकमे के माइक टू अर्थात एडीशनल एसपी द्वारा विगत दिवस बाज टीम की ली गई क्लास के बाद. बताया जा रहा है कि एसपी को किसी परिचित ने जब यह कहा कि आपके समय से ज्यादा ठीक तो पूर्व एसपी पाराशर जी के समय था. तब इतनी सुस्ती नहीं थी. फिर क्या था अपने ही सामने किसी दूसरे एसपी की बड़ाई और अपनी बुराई महाशय को रास नहीं आई और आनन फानन में अपने अधीनस्थ अधिकारी को व्यवस्था सुधारने कह दिया. फिर क्या था आदेश की तामीली में एडीशनल एसपी ने बाज टीम की मीटिंग रखी और उन्हें सख्त निर्देश जारी कर डाले. उधर कार्यवाही हुई और उसका असर अवैध कारोबारियों पर तो दिखा साथ ही संबंधित थानों के टीआई पर भी स्पष्ट दिखा और वे इस जुगाड़ में जुट गये हैं कि यह मुहिम कैसे रुके.
टेंडर घोटाला
हालांकि हम यह वेबसाइट सतना जिले पर केन्द्रित किये हुए थे लेकिन इसकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है और हमें विभिन्न जगहों से खबरे मिलने लगी हैं. इस कड़ी में हमें भिलाई नगर निगम में घोटाले की एक खबर मेल द्वारा भेजी गई है इसमें नगर निगम में किये गए निविदा घोटाले का पर्दाफाश किया गया है.
इसमें बताया गया है कि नगर निगम भिलाई में खेल उपकरणों के क्रय के लिये टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गयी थी जहां इस प्रक्रिया से जुड़े जीएस ताम्रकार द्वारा लंबा लेन देन किया जाकर छत्तीसगढ़ भंडार के अधिनियम को ताक में रखकर टेंडर खोला गया. यहां सिर्फ दो टेंडर फार्म ही बुलाए जाकर निविदा स्वीकृत कर दी गयी और इसकी सूचना पहले ही निगम आयु्क्त को दी जा चुकी थी तथा श्री ताम्रकार को इस प्रक्रिया से अलग रखने को कहा गया था लेकिन निगमायुक्त द्वारा इसपर कोई ध्यान नहीं दिया गया. बताया गया है कि टेंडर फार्म भी भी सिर्फ दो संस्थाओं को दिये गये वह भी आखिरी दिन ही जारी किये गये. जबकि इसके पूर्व जो लोग टेंडर फार्म लेने गये उन्हें यह कह कर बरगला दिया गया कि अभी टेंडर फार्म तैयार नहीं हुए है. इससे इस मामले में लम्बा लेनदेन किया जाकर निविदा प्रक्रिया आयोजित की गयी है.
इसमें बताया गया है कि नगर निगम भिलाई में खेल उपकरणों के क्रय के लिये टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गयी थी जहां इस प्रक्रिया से जुड़े जीएस ताम्रकार द्वारा लंबा लेन देन किया जाकर छत्तीसगढ़ भंडार के अधिनियम को ताक में रखकर टेंडर खोला गया. यहां सिर्फ दो टेंडर फार्म ही बुलाए जाकर निविदा स्वीकृत कर दी गयी और इसकी सूचना पहले ही निगम आयु्क्त को दी जा चुकी थी तथा श्री ताम्रकार को इस प्रक्रिया से अलग रखने को कहा गया था लेकिन निगमायुक्त द्वारा इसपर कोई ध्यान नहीं दिया गया. बताया गया है कि टेंडर फार्म भी भी सिर्फ दो संस्थाओं को दिये गये वह भी आखिरी दिन ही जारी किये गये. जबकि इसके पूर्व जो लोग टेंडर फार्म लेने गये उन्हें यह कह कर बरगला दिया गया कि अभी टेंडर फार्म तैयार नहीं हुए है. इससे इस मामले में लम्बा लेनदेन किया जाकर निविदा प्रक्रिया आयोजित की गयी है.
Tuesday, March 30, 2010
सत्ता पक्ष के विधायक ने कराई सरकार की फजीहत
हमें मिले एक गुमनाम कमेंट में जो जानकारी दी गई है वह यह उजागर कर रही है कि
एक विधायक अपने मतलब के लिये किस हद तक जा सकता है भले ही उसकी हरकत से सरकार की ही फजीहत हो जाये. हमें बताया गया है कि विगत दिवस विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस पार्टी बिजली के मुद्दे पर सरकार को घेर रही थी. चर्चा चल ही रही थी कि तभी सतना जिले के रैगांव विधानसभी क्षेत्र के विधायक जुगुलकिशोर बागरी अचानक उठ खड़े हुए और काग्रेस की बात का समर्थन करते हुए कहने लगे कि सही बोल रहे हैं ये लोग. अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है. भारी भ्रष्टाचार मचा हुआ है. ट्रांसफार्मर के नाम पर घूंस चल रही है कहीं कोई सुनवाई नहीं है.... आदि... आदि...
फिर क्या था कांग्रेस को तो मानो मुंह मांगी मुराद मिल गई और सदन में ही शेम..शेम... के नारे लगने लगे और सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई.
खैर उसी दिन शाम को मुख्यमंत्री ने जुगुलकिशोर को बुलाकर फटकारने लगे इस दौरान वहां कई विधायक मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई तरीका नहीं है. यह नहीं कहता कि आपकी बात गलत थी लेकिन बात का एक मंच होता है. यह सुनकर जुगुल किशोर बागरी अपनी आदत अनुसार कह पड़े - क्या करें हमारी प्याज सूखी जा रही है.
बहरहाल यह सब कुछ होने के बाद मुख्यमंत्री ने जुगुलकिशोर बागरी की लंबी क्लास ली साथ ही वहीं मौजूद उर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को भी तल्ख लहजे में कहा कि देखिये बिधायक जी की क्या समस्या है.
बहरहाल जुगुलकिशोर की सदन में चर्चा जरूर मुद्दे पर थी लेकिन यदि उनकी प्याज न सूख रही होती तो क्या वे आम जनता के लिये इस तरह आवाज उठा सकते यह अपने आप में बड़ा सवाल है...
फिर क्या था कांग्रेस को तो मानो मुंह मांगी मुराद मिल गई और सदन में ही शेम..शेम... के नारे लगने लगे और सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई.
खैर उसी दिन शाम को मुख्यमंत्री ने जुगुलकिशोर को बुलाकर फटकारने लगे इस दौरान वहां कई विधायक मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई तरीका नहीं है. यह नहीं कहता कि आपकी बात गलत थी लेकिन बात का एक मंच होता है. यह सुनकर जुगुल किशोर बागरी अपनी आदत अनुसार कह पड़े - क्या करें हमारी प्याज सूखी जा रही है.
बहरहाल यह सब कुछ होने के बाद मुख्यमंत्री ने जुगुलकिशोर बागरी की लंबी क्लास ली साथ ही वहीं मौजूद उर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को भी तल्ख लहजे में कहा कि देखिये बिधायक जी की क्या समस्या है.
बहरहाल जुगुलकिशोर की सदन में चर्चा जरूर मुद्दे पर थी लेकिन यदि उनकी प्याज न सूख रही होती तो क्या वे आम जनता के लिये इस तरह आवाज उठा सकते यह अपने आप में बड़ा सवाल है...
Sunday, March 21, 2010
एकाउंट अफसर और पांच लाख के फर्जी बिल
न्यूजपोस्टमार्टम को मिले मेल में बताया गया है कि डीआरडीए सतना में एकाउंट आफीसर के पद पर पदस्थ मुकेश राय ने विभाग को लाखों रुपयों की चपत लगाई है. बताया गया है कि राय ने उच्चाधिकारियों को गलत जानकारी देकर पेंमेंट की नोटशीट और फाइल में हस्ताक्षर कराकर सुनियोजित साजिश के तहत लाखों का गोलमाल कराने की भूमिका अदा की है. इतना ही नहीं फर्जी एपीओ, पीओ व पीओ(टी) अजय सिंह को विधि विरुद्ध
भ्रष्ट आचरण अपनाते हुए अजय सिंह को पांच लाख के फर्जी मेडिकल बिल पास जबरदस्त फायदा पहुंचाया है इसमे बकायदे इनका भी शेयर रहा. बताया जा रहा है कि यह मामला कोर्ट जा रहा है जिसमें मुकेश राय भी पार्टी बन सकते हैं.
इस मामले कि विस्तृत जानकारी मेल में भेज सकते हैं.
भ्रष्ट आचरण अपनाते हुए अजय सिंह को पांच लाख के फर्जी मेडिकल बिल पास जबरदस्त फायदा पहुंचाया है इसमे बकायदे इनका भी शेयर रहा. बताया जा रहा है कि यह मामला कोर्ट जा रहा है जिसमें मुकेश राय भी पार्टी बन सकते हैं.
इस मामले कि विस्तृत जानकारी मेल में भेज सकते हैं.
Friday, March 19, 2010
महावीर ज्वेलर्स मामले में प्रिंट मीडिया भी सौदेबाजी में उतरा
महावीर ज्वेलर्स में आभूषणों के लेने देन को लेकर हुए विवाद के बाद गंभीर हुई महिला के मामले में खबरों की सौदेबाजी में प्रिंट मीडिया के भी शामिल होने की चर्चा बाजार में होने लगी है. इसमें जो नाम सामने आ रहे हैं उसके मुताबिक दैनिक भास्कर के एक सबसे पुराने संपादकीय विभाग के व्यक्ति द्वारा संबंधित ज्वेलर्स से चर्चा करने के उपरांत क्राइम देख रहे रिपोर्टर को वहां भेजा था. बताया गया है कि यह पुराना संपादकीय का कर्मचारी एक निजी कालेज में भी सेवाएं देता है तो एक सपा पदाधिकारी पर भी कुछ ज्यादा ही मेहरबान है. बहरहाल यह मामला व्यापारी जगत में चर्चा में काफी आने के बाद मामला मालिकान तक पहुंचा है. इस पर मालिकान ने क्राइम रिपोर्टर पर तो सख्ती की है लेकिन अभी वरिष्ठ कर्मचारी के बारे में जानकारी ली जा रही है. उधर एक अन्य प्रिंट मीडिया में भी फालोअप न देने के नाम पर उगाही की गई है.
Thursday, March 18, 2010
फिर की इलेक्ट्रानिक मीडिया ने सौदेबाजी
विगत दिवस महावीर ज्वेलर्स में हुए आभूषणों को लेकर हुए विवाद में गंभीर हुई महिला और ज्वेलर्स पर संगीन आरोप के बाद एक बार फिर सतना का इलेक्ट्रानिक मीडिया खबरों की सौदेबाजी में जुट गया है. न्यूजपोस्टमार्टम को भेजे मेल में बताया गया है कि इस खबर को रोकने के लिये किसी न्यूज चैनल के फारुख, एसएमएस सेवा के राज, ईटीव्ही के संजय तथा ज्ञान शुक्ला का नाम चर्चा में है. चर्चा है कि इनके द्वारा खबर रोकने के लिये सामूहिक रूप से दस हजार रुपये लिये गये है लेकिन शुरुआती दौर में इनकी डिमांड चालीस हजार रुपये थी. आमतौर पर छोटी छोटी बातों में खबर देने वाले इन रिपोर्टरों ने लेनदेन होने के बारे इस खबर से परहेज किया. हालांकि दूसरे दिन ईटीव्ही के दूसरे रिपोर्टर ने बाद इस खबर को बनाया है. वहीं इस सौदेबाजी में सहारा के नितिन गुरुदेव अलग रहे लेकिन उनकी खबर प्रसारित नहीं हो पायी.
Thursday, March 11, 2010
पत्रकार का गैस सिलेण्डर की सौदेबाजी का खेल बिगड़ा
विगत दिवस रेलवे स्टेशन के स्टैण्ड में नवभारत के एक पत्रकार का गैस सिलेण्डर की कालाबाजारी की सौदेबाजी का खेल उसके ही साथियों की नासमझी ने बिगाड़
दिया. इसकी चर्चा जो आज रही उसके अनुसार विगत दिवस रात को रेलगाड़ी की पैन्ट्रीकार में रखने के लिये घरेलू गैस सिलेण्डर काफी संख्या में रेलवे स्टेशन के स्टैण्ड में रखे थे. तभी इन पर नवभारत के एक पत्रकार की नजर पड़ गई. वह यह सब देख कर सिलेण्डर के साथ आये व्यक्ति पर दबाब बनाने लगा क्योंकि पैन्ट्रीकार में व्यावसायिक सिलेण्डर प्रयुक्त होते है. लेकिन व्यक्ति भी दबने को तैयार नहीं था. इसी दौरान उसके साथी भी वहां आ पहुंचे तभी किसी बात को लेकर न जाने उनमें क्या हुआ और मामला झगड़े में बदल गया. किसी तरह उन्हें शांत करा कर आखिर नवभारत का वह पत्रकार भी वहां से रवाना हो गया. लेकिन अहम बात यह रही है कि सिलेण्डरों के कालाबाजारी की यह घटना अखबार में भी नहीं दिखी जिसे लेकर चर्चा जमकर रही. कहना तो यह भी रहा कि वहां समझौते का खेल चलता है.
अजय सिंह की वापसी को लेकर मीडियाकर्मी भिड़े
जिला पंचायत के बहुचर्चित कर्मचारी अजय सिंह की मूल विभाग में वापसी का असर मीडिया जगत में भी काफी देखने को मिला. जहां उनका चहेता मीडिया
का एक वर्ग काफी मायूस रहा तो दूसरा वर्ग उत्साहित नजर आया. इसी का परिणाम यह रहा कि कल दो मीडिया कर्मी आपस में भिड़ गये. हमे भेजे गये मेल में बताया गया है कि प्रकाश मेडिकल स्टोर में बैठे कुछ मीडियाकर्मियों के बीच अजय सिंह की मूल विभाग में वापसी पर चर्चा चल रही थी तभी किसी मीडियाकर्मी ने यह पूछ लिया कि यह अजय सिंह है कौन. तभी वहां मौजूद एनडीटीव्ही के ज्ञान शुक्ला ने यह कहा कि मैं उसे नहीं जानता और ईटीव्ही के शिवेन्द्र सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि यही बता सकते हैं कि वह कौन है. तभी शिवेन्द्र सिंह ने कहा कि डिजिटल स्टूडियो वाले का बिल लेकर अजय सिंह से पास कराते थे तब तो बहुत अच्छे से जानते थे अब बोल रहे हो कि नहीं जानता. यह सुनते ही ज्ञान शुक्ला उखड़ गये और शिवेन्द्र सिंह से गाली गलौज करने लगे. आखिर शिवेन्द्र सिंह ने भी पलट कर जवाब देते हुए लताड़ लगाई और अपशब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया. इतना होते ही ज्ञान शुक्ला नरम पड़ने लगे और वहां मौजूद लोगों ने भी बीच बचाव कर मामला शांत कर दिया.
बहरहाल जो जानकारी आ रही है उससे पता चला है कि इस मामले की जानकारी नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष गगनेन्द्र सिंह को भी लगी है और उन्होंने शिवेन्द्र सिंह से सद्भावना जताई है.
का एक वर्ग काफी मायूस रहा तो दूसरा वर्ग उत्साहित नजर आया. इसी का परिणाम यह रहा कि कल दो मीडिया कर्मी आपस में भिड़ गये. हमे भेजे गये मेल में बताया गया है कि प्रकाश मेडिकल स्टोर में बैठे कुछ मीडियाकर्मियों के बीच अजय सिंह की मूल विभाग में वापसी पर चर्चा चल रही थी तभी किसी मीडियाकर्मी ने यह पूछ लिया कि यह अजय सिंह है कौन. तभी वहां मौजूद एनडीटीव्ही के ज्ञान शुक्ला ने यह कहा कि मैं उसे नहीं जानता और ईटीव्ही के शिवेन्द्र सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि यही बता सकते हैं कि वह कौन है. तभी शिवेन्द्र सिंह ने कहा कि डिजिटल स्टूडियो वाले का बिल लेकर अजय सिंह से पास कराते थे तब तो बहुत अच्छे से जानते थे अब बोल रहे हो कि नहीं जानता. यह सुनते ही ज्ञान शुक्ला उखड़ गये और शिवेन्द्र सिंह से गाली गलौज करने लगे. आखिर शिवेन्द्र सिंह ने भी पलट कर जवाब देते हुए लताड़ लगाई और अपशब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया. इतना होते ही ज्ञान शुक्ला नरम पड़ने लगे और वहां मौजूद लोगों ने भी बीच बचाव कर मामला शांत कर दिया.बहरहाल जो जानकारी आ रही है उससे पता चला है कि इस मामले की जानकारी नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष गगनेन्द्र सिंह को भी लगी है और उन्होंने शिवेन्द्र सिंह से सद्भावना जताई है.
Tuesday, March 9, 2010
चर्चित अजय सिंह जिला पंचायत से पैतृक विभाग में वापस
अपने कारनामों से हमेशा चर्चा में रहे तथा सीईओ के खास सिपहसालारों में से एक अजय सिंह की विधानसभा द्वारा मूल विभाग में वापसी कर दी गई है. साथ ही इससे संबंधितों पर भी जांच शुरू होगी.
पेश है इस मामले में विधानसभा पर हुई चर्चा
शंकरलाल तिवारीः माननीय अध्यक्ष महोदय एक डेलीवेजेज में काम चलाने के लिये भर्ती किया गया कापरेटिव बैंक रीवा में उपयंत्री और उसने 5 वर्ष तक लगातार जिला पंचायत में कार्यपालन यंत्री हो गया, परियोजना अधिकारी हो गया और करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया. उस पर मेरा प्रश्न था उसके उत्तर में संशोधन में कहा गया है कि हम उसे उसके पैतृक विभाग को वापस भेज रहे हैं. मेरी विनती है कि करोड़ों रुपयों का उसके कार्यकाल में काम हुआ है जिसमें भ्रष्टाचार हुआ और 5 वर्ष तक उसे निरंतर पदोन्नति मिलती रही. एक सामान्य उपयंत्री को बिना किसी नियम के बिना किसी सर्विस बुक के ऐसे व्यक्ति को फर्जी पदोन्नति देने वालों पर कोई दोषी अधिकारी जो थे उन पर कार्यवाही होगी और इसे सिर्फ पैतृक विभाग में वापस भेजना तो में सोचता हूं कि करोड़ों तुम कमाओ और जहां से आए वहां चले जाओ, इसे मुअत्तल करना चाहिये. कम से कम और फर्जी जो पदोन्नति देने वाले अधिकारी है उन पर कार्यवाही करनी चाहिये.
गोपाल भार्गवः माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक को धन्यवाद देना चाहूंगा. माननीय सदस्य ने जो प्रश्न उठाया है निश्चित रूप से गंभीर है और इसी कारण से कल हमने संज्ञान लेते हुए उस कर्मचारी की उसके पैतृक विभाग में वापसी कर दी है इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि वह कापरेटिव का कर्मचारी था और इसमें डुपुटेशन पर आये और पदोन्नति भी लेता रहा इसके लिये जो भी लोग उत्तरदायी होंगे उनके उत्तरदायित्व और उनके दोष के बारे में भी निर्धारण करके उसकी जांच करा लेंगे. उन पर भी कार्यवाही होगी.
शंकरलाल तिवारीः माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा एक सवाल है इसी तरह से वहां तिलहन संघ के अन्य लोग भी डेपुटेशन पर यही काम कर रहे हैं. कांग्रेस के जमाने से 5-5 6-6 सालों से जिसकी मैं अभी चर्चा कर रहा था वे भी कांग्रेस के जमाने से और वहां जिला पंचायत में सिर्फ आम जनता के पैसे का ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं. सामान्य कर्मचारी है यहां आकर के अधिकारी बन गये हैं . जिला पंचायत में ऐसी क्या जांच करा लेंगे तिलहन संघ के.
गोपाल भार्गवः अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य की जैसी मंशा है उसके अनुसार यह बात सही है कि बहुत सी अन्य संस्थाओं के अधिकारी कर्मचारी डेपुटेशन पर लिये गये उनसे काम करवाया गया अब क्या आवश्यकता थी क्या नहीं थी इसके बारे में तो जब संपूर्ण जांच होगी तभी पता चलेगा कि आवश्यकता के अनुसार लिये गये या नहीं, लेकिन तिलहन संघ के कर्मचारियों के बारे में जानकारी है कि अधिकांश लोग उच्च न्यायालय से स्टे लिये हुये हैं और इस कारण से वहां पर भी कार्यरत है. विभाग प्रयास कर रहा है कि वह स्टे जल्दी से जल्दी समाप्त हो और उसे वेकेट करा कर हम विभाग के जो मूल अधिकारी कर्मचारी है उन्हे ही पदस्थ करवाकर उनसे ही काम लें.
शंकरलाल तिवारीः माननीय मंत्री जी को धन्यवाद, अध्यक्ष जी आप को भी धन्यवाद.
संशोधन
प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग ग में
प्रकरण में विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया गया है. जांच के निष्कर्ष के आधार पर कार्यवाही की जायेगी.
के स्थान पर संशोधित उत्तर
प्रकरण प्रकाश में आते ही जांच प्रारंभ की गई. जांच के प्रथम चरण में श्री अजय सिंह की सेवाएं इनके पैतृक विभाग को वापिस कर दी गई है.
पेश है इस मामले में विधानसभा पर हुई चर्चा
शंकरलाल तिवारीः माननीय अध्यक्ष महोदय एक डेलीवेजेज में काम चलाने के लिये भर्ती किया गया कापरेटिव बैंक रीवा में उपयंत्री और उसने 5 वर्ष तक लगातार जिला पंचायत में कार्यपालन यंत्री हो गया, परियोजना अधिकारी हो गया और करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया. उस पर मेरा प्रश्न था उसके उत्तर में संशोधन में कहा गया है कि हम उसे उसके पैतृक विभाग को वापस भेज रहे हैं. मेरी विनती है कि करोड़ों रुपयों का उसके कार्यकाल में काम हुआ है जिसमें भ्रष्टाचार हुआ और 5 वर्ष तक उसे निरंतर पदोन्नति मिलती रही. एक सामान्य उपयंत्री को बिना किसी नियम के बिना किसी सर्विस बुक के ऐसे व्यक्ति को फर्जी पदोन्नति देने वालों पर कोई दोषी अधिकारी जो थे उन पर कार्यवाही होगी और इसे सिर्फ पैतृक विभाग में वापस भेजना तो में सोचता हूं कि करोड़ों तुम कमाओ और जहां से आए वहां चले जाओ, इसे मुअत्तल करना चाहिये. कम से कम और फर्जी जो पदोन्नति देने वाले अधिकारी है उन पर कार्यवाही करनी चाहिये.
गोपाल भार्गवः माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक को धन्यवाद देना चाहूंगा. माननीय सदस्य ने जो प्रश्न उठाया है निश्चित रूप से गंभीर है और इसी कारण से कल हमने संज्ञान लेते हुए उस कर्मचारी की उसके पैतृक विभाग में वापसी कर दी है इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि वह कापरेटिव का कर्मचारी था और इसमें डुपुटेशन पर आये और पदोन्नति भी लेता रहा इसके लिये जो भी लोग उत्तरदायी होंगे उनके उत्तरदायित्व और उनके दोष के बारे में भी निर्धारण करके उसकी जांच करा लेंगे. उन पर भी कार्यवाही होगी.
शंकरलाल तिवारीः माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा एक सवाल है इसी तरह से वहां तिलहन संघ के अन्य लोग भी डेपुटेशन पर यही काम कर रहे हैं. कांग्रेस के जमाने से 5-5 6-6 सालों से जिसकी मैं अभी चर्चा कर रहा था वे भी कांग्रेस के जमाने से और वहां जिला पंचायत में सिर्फ आम जनता के पैसे का ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं. सामान्य कर्मचारी है यहां आकर के अधिकारी बन गये हैं . जिला पंचायत में ऐसी क्या जांच करा लेंगे तिलहन संघ के.
गोपाल भार्गवः अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य की जैसी मंशा है उसके अनुसार यह बात सही है कि बहुत सी अन्य संस्थाओं के अधिकारी कर्मचारी डेपुटेशन पर लिये गये उनसे काम करवाया गया अब क्या आवश्यकता थी क्या नहीं थी इसके बारे में तो जब संपूर्ण जांच होगी तभी पता चलेगा कि आवश्यकता के अनुसार लिये गये या नहीं, लेकिन तिलहन संघ के कर्मचारियों के बारे में जानकारी है कि अधिकांश लोग उच्च न्यायालय से स्टे लिये हुये हैं और इस कारण से वहां पर भी कार्यरत है. विभाग प्रयास कर रहा है कि वह स्टे जल्दी से जल्दी समाप्त हो और उसे वेकेट करा कर हम विभाग के जो मूल अधिकारी कर्मचारी है उन्हे ही पदस्थ करवाकर उनसे ही काम लें.
शंकरलाल तिवारीः माननीय मंत्री जी को धन्यवाद, अध्यक्ष जी आप को भी धन्यवाद.
संशोधन
प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग ग में
प्रकरण में विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया गया है. जांच के निष्कर्ष के आधार पर कार्यवाही की जायेगी.
के स्थान पर संशोधित उत्तर
प्रकरण प्रकाश में आते ही जांच प्रारंभ की गई. जांच के प्रथम चरण में श्री अजय सिंह की सेवाएं इनके पैतृक विभाग को वापिस कर दी गई है.
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