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Wednesday, February 27, 2013

खिल्लू खेलेंगे खबरों से



हमे भेजे मेल में बताया गया है कि सतना के खबरिया जगत में जिस तरीके से नये आगमन हो रहे हैं उसमें अखबारों के साथ ही एक मैग्जीन की भी दस्तक होने वाली है। इस बार खबर के कारोबार में भूमाफिया की इंट्री की खबर है। इसमें जो नाम उभर कर आया है उसमें जमीन कारोबारी और पेप्टेक सिटी के हिस्सेदार खिल्लू प्रमुख है। एक स्कूल के संचालन से जुड़े इस व्यवसायी की मैग्जीन के संपादन में मदद का जिम्मा दैनिक भास्कर अखबार के स्थानीय संपादक विश्वतारा दूसरे का नाम प्रमुखता से आया है साथ ही चंद्रकांत पाण्डेय भी इसमें सहयोगी की भूमिका में होंगे। मेल में बताया गया है कि यह मैग्जीन ग्लैस पेपर में होगी और वितरण वृहद स्तर पर किये जाने की तैयारी है।

Sunday, February 24, 2013

स्टार समाचार को उल्टे पड़ गये बांस बरेली के

यह पहला मौका है जब स्टार समाचार को अपनी ही खबर भारी पड़ रही है। नंबर वन अखबार दैनिक भास्कर से शुरू की गई अहम की लड़ाई का मुकाम अब इस दिशा में पहुंच रहा है कि खुद स्टार प्रबंधन पर भी उंगलियां उठने लगी है। सूत न कपास जुलाहों में लट्ठम लट्ठा की बुनियाद पर जो न्यूज वार चला उसमें स्टार के तरकश में तीरों की भारी कमी दिखी तो ऐसा लगा कि बगैर मेहनत के काम किया गया है।

पत्रिका को लेकर पत्रकारों में संशय

जिस तेजी से सतना में पत्रिका अखबार के आने की तैयारी हो रही है साथ ही इधर से उधर जाने की सूचियां तैयार हो रही हैं उसी गति से इस अखबार को लेकर पत्रकार जगत में नकारात्मकता भी फैल रही है। इस अखबार की विश्वसनीयता को लेकर भ्रम का माहौल बन रहा है। हमें भेजे मेल में बताया गया है कि इस अखबार की नीयत हमेशा टॉप लोगों के खिलाफ नकारात्मक खबरे निकालना रही है। इसमें पहले स्थानीय पत्रकारों का उपयोग किया जाता है बाद में राजस्थान से आये लोगों को इसमें जोड़ कर स्थानीय लोगों को अलग कर दिया जाता है। विरोध होने पर उन्हें अलग करने के प्रयास किये जाते हैं। इससे स्थानीय पत्रकारों का पहले ही लोगों से विरोध हो चुका होता है बाद में वह कुछ करने की स्थिति में नहीं होता। यही वजह है कि कोई सीनियर पत्रकार इसमें जाने की स्थिति में नहीं है। मेल में कहा गया है कि कैलाश विजय वर्गीय का विरोध जमीन की चाहत थी। जबलपुर में रोहाणी का विरोध पत्रिका के गुलाब कोठारी के कार्यक्रम में दिये गये पैसे मांगना रहा।
बहरहाल सतना में एक अन्य अखबार जनसंदेश भी आ रहा है। जो सांसद की मदद से स्थापित हो रहा है। इसमें भी पत्रकारों की पूछपरख होने वाली है। कुल मिला कर मीडिया मंडी के भाव ऊंचे ही रहने वाले हैं।

Thursday, February 21, 2013

अखण्ड के लिये स्टार ने छेड़ी मुहिम

इन दिनों स्टार समाचार और दैनिक भास्कर में एक खबर को लेकर वाद प्रतिवाद चल रहा है। मुद्दा है शहर के विकास के एक प्रस्ताव का जिसमें कलेक्टर ने सिविल लाइन्स को सतना नदी के किनारे ले जाने का प्रस्ताव दिया है। भास्कर ने इसे काफी सकारात्मक लेते हुए शहर के विस्तार को फैलाने की गरज से खबरों का रूप दे रहा है तो कुछ दिनों से स्टार समाचार को बगहा में सिविल लाइन्स ले जाने का फितूर सवार हुआ है। लेकिन खबरचियों का कहना है कि इसके पीछे की कहानी कुछ और है। यहां बगहा की जिस जमीन पर स्टार समाचार सिविल लाइन्स ले जाने की बात कह रहा है वहां पर हाल ही में स्टार ग्रुप के मालिकान से रिश्तेदारी जोड़ने वाले अखण्ड प्रताप सिंह को लाभ पहुंचाना है। खबर है कि यहां की जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। अब उद्योग विभाग इसका उपयोग अपने तरीके से करने की मंशा में है लेकिन लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष की नजर इस बेशकीमती जमीन पर लगी हुई है। वे चाहते हैं यह जमीन उन्हें हस्तांतरित हो जाये तो वे इसका लाभ उठा सकें। सो इस तरीके से स्टार समाचार में खबरों का प्रस्तुतिकरण करने से जिला प्रशासन पर बने दबाव का असर यह होगा कि वह जमीन को लउनि को दे देगा। दूसरी खबर यह भी है कि पुष्कर सिंह महापौर और कलेक्टर में ठनी हुई है और स्टार समाचार पुष्कर के हितलाभों का संरक्षक ज्यादा है। मुख्यमंत्री की बैठक में पुष्कर को जिला प्रशासन के विकास का खाका कांटे की तरह चुभा था सो वह भी इससे प्रसन्न नहीं थे। हालांकि दैनिक भास्कर का मुद्दा इस पर भारी नजर आ रहा है। सिविल लाइन्स आम एरिया नहीं है इसलिये कहीं भी रहे इससे जनता का हित नहीं है। यह सही है कि इस खबर से जमीनों के दाम बढ़े हैं तो इसमें बुराई क्या है। आखिर जमीनों के दाम तो बगहा में भी बढ़ेगे। लगे रहो मुन्ना भाई...

Sunday, February 10, 2013

विश्वतारा की ड्रीम टीम की मालिक ने उड़ाई धज्जियां, कहां लफंटरों को हम जानते हैं

हमें भेजे मेल में बताया गया है कि दैनिक भास्कर में स्थानीय संपादक होने के बाद नियंत्रण व वर्चस्व स्थापित न कर पाने वाले विश्वतारा दूसरे ने पत्रिका अखबार की आमद को अपना हथियार बनाते हुए अपने लोगों को लाने को जो प्लान तैयार किया था उस पर मालिक राकेश अग्रवाल ने पानी फेर दिया। एक वैवाहिक समारोह में शामिल होने के बहाने अपने अखबार के दफ्तर पहुंचे राकेश अग्रवाल अपने साथ यहां से भेजी गई एक रिपोर्ट लाये थे जिसका उल्लेख न्यूज पोस्टमार्टम पहले कर चुका था और इसका सार्वजनिक खुलासा किया। इसमें जहां दैनिक भास्कर के वर्तमान के कई रिपोर्टरों की शिकायतें तो अन्य अखबारों रिपोर्टरों की विशेष व्याख्या करते हुए उन्हें अपने यहां लाने का सुझाव भी दिया गया था।
मेल में बताया गया है कि विश्वतारा ने अपने यहां की टीम में सुदामा शरद के बारे में रिपोर्ट में लिखा था कि ये कुछ नहीं करते हैं। कहने को सिटी चीफ है लेकिन इनका सारा काम विश्वतारा स्वयं को देखना पड़ता है। उपेन्द्र मिश्रा के बारे में लिखा गया था कि ये अक्सर शराब के नशे में रहते हैं और कोई काम नहीं करते हैं। कमलेश के बारे में लिखा गया था कि लिखते बढ़िया है लेकिन लिखते नहीं है। गलत लोगों के साथ उठना बैठना है और गुंड़ों को दफ्तर बुलाते हैं। अराजकता फैलाते हैं। धामी को भी अयोग्य साबित करने की पूरी कोशिश की गई थी साथ ही वन व विद्युत विभाग देखने वाले को गंजेड़ी साबित किया गया था।
ठीक इसके विपरीत इन्हें हटा कर अन्य अखबारों से लाने के लिये जिन रिपोर्टरों का प्रस्ताव किया गया था उनमें नवभारत से मनोज रजक को आलराउण्डर और हर तरह की खबर लिखने वाला, राजेश द्विवेदी को स्टार समाचार का सिटी चीफ और आलराउण्डर, योगीतारा दूसरे को स्टार समाचार का विशेष संवाददाता सहित दैनिक भास्कर का पुराना कर्मचारी और स्वास्थ्य में महारथ, महेन्द्र पाण्डेय को स्टार का विशेष संवाददाता, नगर निगम और जिला प्रशासन में विशेष पकड़ के साथ आल राउण्डर, सुखेन्द्र मिश्रा को कृषि व व्यापार में विशेषज्ञता बताते, पत्रकारिता से अलग चल रहे चंद्रकांत पाण्डेय को आल राउण्डर रिपोर्टर, संतोष पाण्डेय को क्राइम रिपोर्टर तथा नई दुनिया के अखिलेश का नाम भी लाने वालों की सूची में दिया गया था।
दैनिक भास्कर के मालिक ने इस सूची को सार्वजनिक करते हुए कहा कि हम इसी टीम से काम चलायेंगे। हमारी यही टीम सही है। राजेश द्विवेदी और मनोज रजक जैसे लफंटरों को हम जानते नहीं है क्या, ये कितने पानी में है। इसी तरह राकेश अग्रवाल ने अन्य सभी संभावित आगंतुक रिपोर्टरों की कमिया सामने रखते हुए किसी दूसरे की आवक से इंकार कर दिया। मेल में कहा गया है कि इस दौरान कमलेश चौबे ने इस एक तरफा रिपोर्ट की हकीकत बयां करते हुए सच्चाई सामने रखी। जिसमें लोगों को अवसर न दिये जाने और कुछ के बचाव की बात भी कही गई।

पुष्कर सपा और सुखलाल जाएंगे भाजपा में

हमें भेजे गये मेल में बताया गया है कि सतना की दो उच्चमहत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञ विधानसभा चुनावों की बदली राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर अपनी राजगणित लगानी शुरू कर दी है। इसके अनुसार सुखलाल का दामन थाम कर बहुजन समाज पार्टी से महापौर का चुनाव जीतने वाले पुष्कर सिंह तोमर ने जिस तरीके से अपने राजनीतिक लाभ के लिये भारतीय जनता पार्टी का दामन पुनः थाम कर महापौरी चलाई, अब अपने विधानसभा चुनाव के सपने को फलीभूत करने के लिये समाजवादी पार्टी का दामन पकड़ने में जुटे हैं। मेल में बताया गया है कि वे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से सतत संपर्क में बने हुए हैं और विधानसभा चुनाव की टिकट पर केन्द्रित हैं।

मेल में यह भी बताया गया है कि ठीक इसी तरह से प्रदेश के कुशवाहों को वोट और नोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने की ताकत रखने वाले बहुजन समाज पार्टी के प्रधान नेता सुखलाल कुशवाहा भी भारतीय जनता पार्टी के सतत संपर्क में है। मामला बस सीटों को लेकर अटका है वरना इनका भाजपा में आना तय है। मेल में कहा गया है कि सुखलाल अपने लिये सांसदी और अपने पुत्र के लिये अमरपाटन विधानसभा की टिकट का सौदा कर रहे हैं और इसमें भाजपा भी राजी है लेकिन इसके अलावा वे प्रदेश से ६ अन्य सीटें भी मांग रहे हैं वह भी भाजपा की जीती सीटें। बात इन्ही ६ सीटों पर अटकी है। हालांकि जिस तरीके से भाजपा के बड़े लीडरों से समझौता वार्ता चल रही है उससे यह तो माना जा रहा है कि सुखलाल को राजी कर लिया जायेगा।

Thursday, January 31, 2013

विश्वतारा ने खड़े किये हाथ, स्टार को होगा सर्वाधिक नुकसान

अब सतना में बड़े अखबार समूह के दैनिक पत्रिका का आगमन तय हो चुका है और इसका बाजार में सर्कुलेशन सर्वे भी शुरू हो चुका है। जिस तरीके की तैयारियां चल रही है उससे फरवरी में इसकी प्रिंटिंग मशीन भी लगना तय माना जा रहा है। इस अखबार की दस्तक के साथ ही सतना के सबसे बड़े अखबार दैनिक भास्कर ने अपना होल रिव्यू शुरू कर दिया है। हालांकि टेक्निकल तैयारियां पूरी कर चुके दैनिक भास्कर के संपादकीय के मुखिया विश्वतारा दूसरे ने अपने प्रबंधन को संपादकीय को जो रिपोर्ट भेजी है वह काफी चौंकाने वाली है। इसमें उन्होंने हालिया टीम के दम पर पत्रिका से मुकाबला करने में खुद को अक्षम बताया है और इसमें नाकारा लोगों की जानकारी भी दी है। अखबार जगत की कनबतियों के अनुसार इसमें भी विश्वतारा ने अपने चमचों को नाकारा की सूची से बाहर रखा है जिसे लेकर संपादकीय में असंतोष उमड़ा। इसके साथ ही उनकी संपादकीय असहिष्णुता भी संपादकीय प्रबंधन में अंदरूनी विवाद का कारण बनी हुई है। चमचों को प्रमोट करने की उनकी कार्यशैली के कारण अरविन्द मिश्रा जैसे वरिष्ठ लोगों ने खुद को हाशिये पर कर लिया है तो मनोज रावत औरपंकज जोशी भी अपनी निगेटिक रिपोर्टिंग को लेकर एक दूरी बनाये हुए हैं। कमलेश को शुरुआत से ही पसंद नहीं कर रहे विश्वतारा दूसरे की गुड एवं ड्रीम टीम में उनके हमप्याला और चमचे नुमा कुल जमा पांच लोग हैं।
उधर जिले के नंबर दो अखबार की बात करें तो पत्रिका के आने से सबसे ज्यादा नुकसान इसी अखबार का तय है। अकुशल संपादकीय प्रबंधन और असंतोष इस अखबार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचायेगा। सर्कुलेशन और कर्मचारियों का सबसे ज्यादा नुकसान इसी अखबार को होना पत्रकार जगत की उथल पुथल में है। अभी तक यहां भी किसी तरह का आपदा प्रबंधन नहीं शुरू हुआ है।
दैनिक जागरण और नवस्वदेश ऐसे अखबार होंगे जिनकी सेहत पर कोई फर्क इस अखबार के आने से नहीं पड़ने वाला है। जबकि नवभारत अपने आपकों कुछ बहुत सुधारने में लगा है। हालांकि इसके पीछे चुनावी तैयारी है न कि पत्रिका का भय।

Friday, January 18, 2013

पत्रिका की धमक के साथ ही भास्कर की रक्षात्मक तैयारियां शुरू

लंबे अरसे के बाद अब सतना में राजस्थान पत्रिका के मध्यप्रदेश ग्रुप पत्रिका के सतना संस्करण की तैयारी अंतिम रूप लेने लगी है। इसका पाठक सर्वे शुरू हो रहा है तो सर्कुलेशन की भर्ती प्रक्रिया भी प्रारंभ है। इसके साथ ही यहां स्थानीय स्तर पर बायोडाटा लिये जाने लगे हैं। इस सबको लेकर पत्रिका की आमद अब जहां तय मानी जा रही है वहीं मुख्य प्रतिद्वंद्वी की भूमिका निभाने वाले दैनिक भास्कर ने भी अपनी रक्षात्मक तैयारियां शुरू कर दी है। इसके मैनेजमेंट ने जहां कर्मचारियों की सेलरी सीट मंगाई है और सेलरी बढ़ाने की तैयारी में है तो अन्य तकनीकि श्रेष्ठता के उपाय कर रहा है। दूसरे प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्टार समाचार रहेगा और सर्वाधिक नुकसान इसी अखबार का संभावित है। अब इस खेल में कौन कितना और कैसे खेलता है यह तो वक्त बतायेगा लेकिन काफी संख्या में कर्मचारी इधर से ऊधर होंगे जिसमें स्टार के कर्मचारियों की संख्या ज्यादा ही होने वाली है।

Wednesday, January 16, 2013

वेलडन जागरण, स्टार की संपादकीय अदूरदर्शिता

सीमा पर जिन दो सैनिकों को पाकिस्तानी सेना ने बर्बरता से मौत के घाट उतारा है और इन सैनिकों की सहादत पर पूरा देश उबल रहा है उनमें एक सीधी जिले के ग्राम दढ़िया का सुधाकर सिंह है। जब पूरा देश सम्मान पर उतरा हुआ है ऐसे में बुधवार १६ जनवरी को सेना के उपसेनाध्यक्ष अनिल चैट ने दढ़िया जाकर श्रद्धांजलि दी और परिजनों को ढाढ़स बढ़ाया। इसके साथ ही सेना की ओर से ४४ लाख देने की घोषणा की।
इस महत्वपूर्ण खबर ने विन्ध्य के सभी अखबारों में प्रथम पेज में प्रमुखता से जगह पाई लेकिन रोज शहादत की तमाम खबरे देने वाले स्टार समाचार के प्रथम पेज में कही इसका उल्लेख तक नहीं मिला। यही हाल नई दुनिया का भी रहा। स्थानीयता को प्रथम पृष्ट पर वरीयता के लिये पहचाने जाने वाले अखबार से यह खबर गायब होना थोड़ा अचंभित कर गया। सबसे बढ़िया कव्हरेज दैनिक जागरण ने दिया तो इसी खबर को भास्कर ने भी प्रमुखता से स्थान दिया है।

Tuesday, January 8, 2013

भास्कर मालिक अजय अग्रवाल का दम

हड्डियों तक पहुंचने वाली ठंड से सतना का मीडिया जहां कंपकंपा रहा है इसके विपरीत दैनिक भास्कर के मालिक अजय अग्रवाल का पारा उछला हुआ है। हमें भेजे गये मेल में बताया गया है कि विगत सप्ताह उनके दफ्तर के सामने खुले दैनिक जागरण के एक वरिष्ठ का पंगा उनके वाहन चालक से क्या हुआ कि मामला गाली गलौज तक पहुंच गया। दोनों ने एक दूसरे को जम कर गालियां दी। मामला अजय अग्रवाल तक पहुंचा तो उनका भी जमीन जागा कि उनके चालक को कोई कैसे दम दे सकता है सो उन्होंने वरिष्ठ का पारा ठंडा तो किया ही इसकी सूचना थाने में दी और पुलिस अधीक्षक को भी बताया। मेल में बताया गया है कि इस शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच करने भी पहुंची थी। इसी तरह एक अन्य मेल में बताया गया है कि संपादक के खास माने जाने वाले आशीष पाठक को नशे में धुत्त पाकर अजय अग्रवाल ने जमकर लताड़ा और भला बुरा कहा। इसी दौरान उनके पीछे चल रहे त्रिपाठी जी ने किसी तरह खुद को वहां से बचाया। मेल में कहा गया है कि इन दिनों भास्कर में कार में शराबखोरी का दौर चलता है।

Saturday, January 5, 2013

नगर निगम कर्मी बीएन सिंह छेड़खानी करने पर पिटा

एक ओर दिल्ली रेप के बाद जहां पूरे देश में महिला सुरक्षा को लेकर आवाज उठने लगी है और पुलिस प्रशासन सजगता की बात कर रहा हैं वहीं सतना में ऐसा नहीं हो पा रहा है। महिला हिंसा के मामले में जीआरपी ने जिस तरीके से चुप्पी साधी है वह बड़े लेनदेन की ओर इशारा कर रहा है। हमे भेजे मेंल में बताया गया है कि शनिवार की शाम को रेलवे स्टेशन में नगर निगम का कर्मचारी बीएन सिंह नशे की हालत में रिजर्वेशन काउंटर में पहुंचा हुआ था। इसी दौरान उसकी नजर वहां बैठे एक युवती पर पड़ी जो अकेली थी। बीएन सिंह वहां जाकर उसके पास बैठ गया और जब कुछ देर उसे अकेला बैठा पाया तो उसके साथ छेड़खानी करने लगा। लेकिन वह महिला अकेले नहीं थी, उसका फौजी पति भी उसके साथ था जो टिकट कटा रहा था। बीएन सिंह की हरकत पर महिला के चिल्लाने पर पति तुरंत वहां पहुंचा और बीएन सिंह की जमकर धुनाई कर दी और इसकी जानकारी जीआरपी को दी। जीआरपी भी मौके पर पहुंची और बीएन सिंह का मेडिकल परीक्षण कराया। इस दौरान तक बीएन सिंह ने घटना से नगर निगम अतिक्रमण प्रभारी रमाकान्त शुक्ला को अवगत कराते हुए मदद की गुहार लगाई। हुआ भी वही यहां रमाकांत शुक्ला के लिये महिला की इज्जत से ज्यादा बीएन सिंह की इज्जत लगी और लेदेकर जीआरपी से बीएनसिंह को छुड़ा लिया। इस मामले में मीडिया भी सौदेबाजी का हिस्सा बना है।

Friday, January 4, 2013

सांसद के खेल में फंसे सतना के पत्रकार

सतना के मीडिया का दिमागी दिवालियापन उस वक्त सामने आ गया जब पूरा का पूरा मीडिया सांसद की खेल पालिटिक्स में फंसा नजर आया। 5 जनवरी को बसपा के प्रभावशाली नेता सुखलाल कुशवाहा ने विवादास्पद और राजनीतिक मायनों से भरा शूद्र महासम्मेलन का आयोजन किया था। पूर्व घोषित इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक जगत में काफी हलचल रही और सभी की निगाहें इस सम्मेलन पर रही। लेकिन सतना की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले सांसद गणेश सिंह ने एन वक्त पर तुरुप का इक्का खेला और उसमें पूरा मीडिया जगत फंस गया। जिस 12 बजे से 5 जनवरी को शूद्र महासम्मेलन का आयोजन था ठीक उसी समय पर सांसद गणेश सिंह ने धवारी स्टेडियम में पत्रकारों के बीच मैच का आयोजन करवा दिया। इसमें दोनों टीमें पत्रकारों की होंगी और इसका समय भी 12 बजे से रखा। अब सभी समझ सकते हैं कि सतना का ज्यादातर मीडिया शूद्र महासम्मेलन के वक्त धवारी में होगा और सम्मेलन से मीडिया की निगाहें हट जायेंगी या उसके निहितार्थ और असर पर मीडिया की प्रभावी नजर नहीं रह जायेगी। कुल मिलाकर सांसद की क्रिकेट पालिटिक्स में मीडिया क्लीन बोल्ड हो गया और सांसद ने एक तीर से कई निशाने साध लिये।