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Monday, April 25, 2011

साइबर संचालक ने फैलायी नजीराबाद हाट क्लिप

हमें भेजे मेल में बताया गया है कि सतना में एक माह से तहलका मचा रही नजीराबाद हाट के नाम की अश्लील मोबाइल क्लिप जो अब सीडी में उपलब्ध है को फैलाने में एक साइबर संचालक का हाथ है।

इस सीडी में कोर्ट के एक रीडर और एक जैतवारा की महिला के बीच न्यूड व अंतरंग दृश्यों का फिल्मांकन किया गया है। मेल में जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार पन्नीलाल चौक के समीप स्थित एक साइबर कैफे का संचालक जो राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है तथा मीडिया से खुद को जुड़ा बताता है के संबंध पहले जैतवारा की इस महिला से रहे हैं। अपने किसी काम के संबंध में उसके संबंध कोर्ट में रीडर से बने और इन संबंधों को और भुनाने उसने जैतवारा की महिला मित्र (जो कथित रूप से देह व्यापार में संलिप्त बताई जाती है ) का परिचय रीडर से कराया। पहले से महिलाओं में रुचि रखने में बदनाम इस रीडर को इस महिला से अपने संबंध प्रगाढ़ करने में ज्यादा वक्त नहीं लगा और स्थितियां यह हो गई कि महिला के संबंध साइबर संचालक से ज्यादा प्रगाढ़ रीडर अफजल से हो गये। उधर साइबर संचालक व रीडर के बीच इस संबंध की वजह से उनके बीच दूरियां बढ़ने लगी। लेकिन साइबर संचालक ने महिला से अपने संबंध बरकरार रखे यह अलग बात रही कि महिला का संचालक से मिलना न के बराबर हो गया और वह रीडर के ज्यादा करीब रहने लगी।
उधर दुनियादारी के सभी गुर सीख चुकी इस महिला ने रीडर को अपनी मुट्ठी में करने के लिये उसी से अपने अंतरंग क्षणों की मोबाइल क्लिप बनवा कर अपने ही मोबाइल पर सुरक्षित कर रखी थी। उधर कुछ माह पूर्व उस महिला का साइबर संचालक से मिलना हुआ और पुरानी मित्रता के चलते एसएमएस आदान प्रदान होने लगा इसी बीच साइबर संचालक ने उस क्लिप को भी देख लिया और धीरे से अपने मोबाइल में लेकर पूरे बाजार व नेट में फैला दिया। बताया गया है कि साइबर की आड़ में इसके कई अन्य युवतियों से मित्रता है। उधर एक अन्य जानकारी जो सामने आ रही है उसके अनुसार कोर्ट इस मामले को स्वयं संज्ञान ले रही है और चर्चा है कि न्यायाधीश इस मामले में मुकदमा पंजीबद्ध करने का मन बना रहे हैं।

Saturday, April 23, 2011

जुलाई के बाद होगा अखबार संग्राम

प्रदेश की राजधानी में इन दिनों दैनिक भास्कर व पत्रिका अखबार के मालिकानों व मैनेजमेंट की बैठकों का दौर शुरू हो गया है और यह बैठक सतना जिले को लेकर केन्द्रित है। इसका मतलब अब सतना में पत्रिका की आने की तैयारी को अंतिम रूप देना है तो दैनिक भास्कर को इसके बचाव की तैयारी करना है। दैनिक भास्कर प्रबंधन के अनुसार वे पत्रिका की आमद सतना में जुलाई के बाद मान रहे हैं और इसी को आधार मानकर सतना में अपनी तैयारियां प्रारंभ कर चुके हैं। उनकी नई मशीन आ चुकी है तो पेज बढ़ना लगभग तय है। टाइम मैनेजमेंट के नजरिये से भी मशीन के साथ पेस्टिंग विभाग का आधुनिकी करण किया जा रहा है और यहां सीधे डीटीपी से प्लेट (सीटीपी अर्थात कम्प्युटर टू प्लेट) बनाने की सुविधा होगी। अब उनका जोर संपादकीय को मजबूत करना होगा और उनका वेतन भत्ता सुधारना भी चुनौती होगी। राजधानी में कुछ दिन पहले हुई बैठक में इस पर चर्चा के बाद सतना के कर्मचारियों की सूची मंगाई गई है। इस सूची के बाद इनके वेतन में और सुधार की गुंजाइश है। वहीं पत्रिका भी इसके लिये तैयार हो चुका है और जिले के पत्रकारों के बारे में नब्ज लेना शुरू कर चुका है।

Friday, April 22, 2011

आ रही है विदाई की बेला

इन दिनों जल्द ही शहर के कर्ताधर्ता स्तर के अधिकारियों की विदाई की बेला निकट आ रही है। जो सबसे ज्यादा चर्चा में नाम हैं उनमें कलेक्टर सुखबीर सिंह, सीईओ आशीष कुमार और पुलिस अधीक्षक हरि सिंह यादव हैं। हालांकि इसमें आशीष कुमार का सतना से जाना लगभग तय माना जा रहा है। इनका तबादला देवास होने की तथा यहां पन्ना या रीवा से आने की संभावना प्रबल है। कलेक्टर के स्थानान्तरण का रेशियों 70:30 चल रहा है। इसमें 70 रुकने व 30 जाने की स्थितियां हैं। वहीं अपनी नेताओ वाली छबि की वजह से एसपी के खिलाफ भी नेताओं की एक जमात लगी हुई है तो खुद उनके महकमें के ही लोग उनका स्थानान्तरण करवाने में लगे हैं। इनका यादव प्रेम भी इस आग में घी का काम कर रहा है। दो महीने तक इन पर स्थानान्तरण की तलवार लटक रही है। यदि इससे बचे तो बचे।

Tuesday, February 22, 2011

जमीन के खुलासे में प्लाट का सौदा

हमें भेजे गये मेल में बताया गया है कि इन दिनों जमीनों का खुलासा करने वाले एक अखबार में इन खबरों के नाम पर दलाली भी शुरू हो गई है। इसके साथ ही शहर के मीडिया जगत में इस बात का काफी शोर है कि खबर के बाद लेनदेन जोरों पर चल रहा है। मीडिया जगत की चर्चाओं को सही माने तो किसी अग्रवाल से एक रिपोर्टर का एक प्लाट पर सौदा तय हुआ है और उस पर नजरे इनायत हो रही है। यह जानकारी पत्रकार जगत में चर्चा में आने के बाद नंबर 1 का दावा करने वाले अखबार ने भी जमीन की खबरों पर फोकस कर दिया है। इस मामले में मेल में बताया गया है िक यह पीड़ित पक्ष का बचाव का हथकडा भी है और वह नंबर वन अखबार के सहारे प्रोटेस्ट करना शुरू कर दिया है। हालांकि न्यूजपोस्टमार्टम टीम यह पुष्ट करने और पता लगाने में लगी है कि किस पत्रकार ने किससे सौदा किया है लेकिन यह भी पता चला है िक जमीन के कारोबारियों का एक ताकतवर वर्ग इस मामले में सत्ता व प्रशासन से संपर्क कर पलटवार की तैयारी कर रहा है। इस वर्ग के निशाने पर वह जानकारी है जिसमें तत्कालीन कलेक्टर के समक्ष अखण्ड प्रताप सिंह के साथ एक व्यवसायी मिलने गया था तो कलेक्टर ने उस वक्त अखण्ड के दबाव पर फाइल को थाम तो िलया था लेिकन अब वह फाइल फिर खोजी जा रही है। इसमें भाजपा युवा वर्ग के लोग सीनियरों के इशारे पर सक्रिय हुए हैं।

Saturday, February 5, 2011

दैनिक भास्कर के चेयरमैन का काला चिट्ठा प्रकाशित

दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेश अग्रवाल की बदनामी की कथा का प्रकाशन राजस्थान में हुआ है। इसमें उनकी कुटिलता का पूरा बखान किया गया है।
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सांसद गणेश सिंह के गांव में एमपीईबी के छापे का मतलब...

विगत दिवस बिजली विभाग की एक हरकत से सांसद गणेश सिंह की काफी किरकिरी तो हुई लेकिन इस घटना क्रम ने यह बता दिया कि इन दिनों सांसद की अनबन नागौद विधायक व लोनिवि मंत्री नागेन्द्र सिंह के अलावा जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ला से भी हो गई है। बताया गया है कि मंत्री पद की महत्वाकांक्षा पाल कर चल रहे सांसद गणेश सिंह इन दिनों आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति में अभी से चल रहे हैं। इसके साथ ही अपने बढ़े राजनीतिक कद का अहम भी उनमें अब नजर आने लगा है। इसी फेर में कुछ दिनों पहले सांसद ने पाला पीड़ित किसानों की मदद के नाम पर ऐसा बयान दे दिया की उर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के हाथ पांव फूल गये। सांसद ने कहा था कि किसानों को बिजली बिल की माफी मिलेगी। अब सरकार यदि ऐसा करती है तो उतना पैसा सरकार को विभाग को देना होगा इस स्थिति में सरकार है नहीं और ऐसे में उर्जा मंत्री की किरकिरी तय मानी जा रही थी क्योंकि विपक्ष को यह एक हथियार मिलने वाला था। सांसद का यह गेम शुरुआत में ही उर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को समझ में आ गया और उन्होंने विभाग को ईशारा कर दिया नतीजा यह हुआ कि सांसद के गांव में ही बिजली विभाग का छापा पड़ गया और भारी संख्या में बिजली चोरी उजागर हुई और इसमें भी सबसे ज्यादा सांसद के सजातीय लोग ही पकड़े गये। हालांकि मीडिया मैनेजमेंट में माहिर सांसद ने किसी तरह से स्थानीय मीडिया की नजर से यह घटना संभलवा ली लेकिन अब उनके समर्थक किसानों की डूबती लुटिया को बचाने सांसद को वहां पदस्थ लाइन मैन को हटाने की चिट्ठी लिखनी पड़ी तो अब उन्हें उर्जा मंत्री से भी चर्चा करनी पड़ेगी। हालांकि इस बार राजेन्द्र शुक्ल बाजी मार गये लगते हैं लेकिन अब स्पष्ट तो हो गया है कि सांसद को तीन मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ेगी। इसमें पहला मोर्चा मंत्री नागेन्द्र सिंह, दूसरा विधायक शंकरलाल तिवारी तथा तीसरा रीवा विधायक व जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ला का होगा।
उधर यह चर्चा अब जोर पकड़ चुकी है कि अगली विधानसभा में सांसद गणेश सिंह का हाथ आजमाना तय है और इसमें वे रामपुर बाघेलान या अमरपाटन में अपनी बाजी खेलेंगे लेकिन सतना पर भी उनकी निगाहें बनी हुईं हैं।

दैनिक भास्कर के अतिथि सर्किट हाउस में शराब पीकर लुढ़के

अब तक सर्किट हाउस नेताओं और उनके कारिन्दों द्वारा की जाने वाली हरकतों की वजह से चर्चित रहता था लेकिन हाल ही में ऐसा मामला सामने आया है जिसमें शहर का नम्बर वन अखबार दैनिक भास्कर दागदार हो गया है। वाकया यह है कि चार पांच दिन पहले सर्किट हाउस का एक कमरा दैनिक भास्कर के जीएम पुष्पराज सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट से कह कर बुक कराया। यहां बताने लायक मामला यह है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने नियम विरुद्ध तरीके से यहां कमरा एलाट कर दिया और इसकी इन्ट्री न करने के लिये सर्किट हाउस के कर्मचारियों को कह दिया गया। सिटी मजिस्ट्रेट के कहने पर सर्किट हाउस का कमरा दैनिक भास्कर के जीएम पुष्पराज सिंह के नाम पर एलाट हो गया और यहां जबलपुर से दैनिक भास्कर का एक सज्जन यहां आकर रुक गया। शक्ल सूरत में सांवला सा यह शख्स अपने आप में काफी बड़ा शराबी बताया जा रहा है। कहते हैं कि दैनिक भास्कर का यह अतिथि यहां आने के बाद से ही लगातार शराब पीने में जुट गया। लगातार शराब की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी जो सर्किट हाउस के कर्मचारियों को भी खलने लगी थी। कोई बात न हो इसके मद्देनजर यहां के कर्मचारियों ने इसकी शिकायत सिटी मजिस्ट्रेट से कर दी। उधर यह कर्मचारी नशे में इस कदर डूब गया कि अपने से चल फिर पाने में असमर्थ रहा और सीढ़ी चढ़ते वक्त लुढ़क गया। यह देख यहां के कर्मचारियों के हाथ पाव फूल गये और उसे कमरे से बाहर का रास्ता दिखाकर राहत की सांस ली। इस दौरान इसके कमरे से 9 शराब की बोतलें पायी गयी थीं।
दैनिक भास्कर के मालिक का सिटी मजिस्ट्रेट को पत्र
इस मामले में एक दूसरा पहलू यह भी सामने आया है कि इस घटना की जानकारी जब दैनिक भास्कर के स्थानीय मालिक अजय अग्रवाल को लगी तो वे चकरा गये। उनकी जानकारी के बगैर उनके संस्थान के जीएम पुष्पराज सिंह द्वारा सर्किट हाउस में किसी को ठहराना उन्हें नागवार गुजरा वह भी तब उसकी हरकत से संस्था की बदनामी हो। ऐसे में उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को तत्काल ही पत्र लिख डाला। जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भविष्य में सर्किट हाउस में दैनिक भास्कर के नाम पर कोई भी कमरा तब तक न दिया जाये जब तक उनका अनुरोध पत्र शामिल न हो। इससे यह मामला उलझ गया है कि पुष्पराज सिंह आखिर दैनिक भास्कर के नाम पर किस अतिथि को ठहराये हुए थे। हालांकि चर्चा है कि इन दिनों भास्कर में वे ज्यादा ताकतवर हो कर सामने आये हैं और वे संपादकीय पर भी भारी हैं इस वजह से शहर में संपादकीय का भी लाभ उठारहे हैं। यही वजह है कि अक्सर वे पत्रकार वार्ताओं में भी न केवल नजर आते हैं बल्कि सवाल भी पूछते हैं। यह अलग है उन सवालों का संपादकीय से कोई लेना देना नहीं होता न ही वे अखबार में दूसरे दिन दिखते हैं लेकिन होता यह जरूर है कि संबंधित की जेब जरूर ढीली होती है।

Sunday, January 2, 2011

पत्रिका के दर पर होने लगी दस्तक

पत्रिका के सतना आने की तैयारियां लगभग तय हो चुकी हैं लेकिन समय को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। हमें भेजे मेल में बताया गया है कि पत्रिका को अभी आने में लगभग चार से पांच माह लग सकते हैं वहीं जबलपुर के स्टाफ को इस बाबत तैयार रहने के भी संकेत दे दिये गये हैं। बताया गया है कि अखबार के एक बड़े अधिकारी यहां का दौरा करके जा चुके हैं तो सर्वे विभाग का आना जाना लगा है।
उधर एक अन्य जानकारी में सतना के पत्रकार जगत में भी इसकी हलचल दिखने लगी है। कई लोग तो अभी से पत्रिका के दर पर दस्तक ठोंक आये हैं। बताया जा रहा है कि सबसे पहले दस्तक देने वाले चन्द्रकांत पाण्डेय हैं, इसके बाद निरंजन शर्मा भी अपनी जुगत लगा चुके हैं तो शक्तिधर दुबे भी चर्चा कर चुके हैं। इसी प्रकार भास्कर के उपेन्द्र मिश्रा भी जबलपुर में चर्चा कर चुके हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य नाम है जो नामवर नहीं है। बहरहाल जितने भी नाम बताये गये हैं इनकी कोई भी कोशिश अभी सफल नहीं कही जा सकती है क्योंकि ये सभी उस टीम तक नहीं पहुंच सके हैं जो नियुक्ति कर्ता होती है। बहरहाल ये अपने संबंध मजबूत करने जबलपुर व भोपाल के प्रबंधन स्तर से लगातार टच में हैं।
हालांकि पत्रिका का बिलासपुर का पोस्टपोंड होना सतना के खाते के लिये सकारात्मक है। उधर भास्कर भी इसे भांप रहा है। और अपनी तैयारी में जुटा है। बहरहाल पत्रिका के आने पर सबसे ज्यादा झटका स्टार समाचार को ही लगेगा क्योंकि उसकी टीम अभी भी मजबूत नजर नहीं आ रही है। भास्कर का कम्प्यूटर स्टाफ भी बाहर जाने को तैयार बैठा है। राज की टीम के कुछ अच्छे लोग भी पत्रिका उठा सकती है ऐसे संकेत हैं।

निरंजन की रामवन कथा

वरिष्ट पत्रकार निरंजन शर्मा जो स्टार समाचार में अब तक या तो विवादित या फिर किसी को सपोर्ट करने वाली खबरे ही ज्यादा बनाई हैं ने एक फिर रामवन की एक स्टोरी छाप कर चापलूसी की पराकाष्ठा पार कर दी। जितनी बड़ी स्टोरी प्रकाशित की गई है उतनी बड़ा मामला यह नहीं था। यहां संपादकीय कमी स्पष्ट दिखी की आखिर संपादक इस स्टोरी को इतना स्पेस कैसे दे रहे हैं, दूसरा निरंजन शर्मा ने शहर के दो सबसे बड़े लिजलिजे व घटिया (शहर वासियों की नजर में) श्री कृष्ण माहेश्वरी तथा अखण्ड प्रताप सिंह का चरण चुंबन कर अपना हल्का पन सामने ला दिया। उनसे इतनी घटिया स्टोरी की उम्मीद नहीं रही। बहरहाल यदि उन्हें रामवन पर लिखना है तो क्या वे साहस दिखा पायेंगे उस सच को सामने लाने का जो वहां चल रहा है कि अखण्ड प्रताप सिंह व अन्य ने वहां अपनी जमीनों को आसमान में पहुंचाने क्या खेल किया, श्री कृष्ण माहेश्वरी जेसे दलाल समाजसेवी जो फिनायल न लेने वाले विभाग प्रमुखों की सरकार से क्लास लगवाते हैं ने सरकारी पैसे को अपनी अंटी में डालने के लिये समिति गठित कर रामवन में काम शुरू किया और यहां लाखों रुपये शासन के अपने कब्जे में कर लिये। शासन की योजनाओं को अपने नाम जोड़कर जनता को ये सभी बेवकूफ बना सकते हैं लेकिन इस काकस मंडली की हकीकत एक चोर से ज्यादा नहीं है जो सत्ता व संगठन के दम पर पाक साफ बचा है।

Friday, December 24, 2010

गणेश व शंकर बीच किसने बड़ी की खाई

बिगत दिवस सांसद गणेश सिंह की भतीजी की शादी पर तमाम बड़े नेता आये। लेकिन इस अवसर पर कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय रहे जो इस अवसर का अपने हित में पूरी तरह से कूटनीति का प्रयोग किया।
इस दिन दो घटनाक्रम हुए जो कूटनीति के बड़े उदाहरण हैं
1. शंकरलाल तिवारी की बेइज्जतीः
हमें भेजे गये मेल में बताया गया है कि इस दिन हवाई अड्डे पर पुलिस के एक अधिकारी द्वारा विधायक शंकरलाल तिवारी को बाहर निकालने की बात को इस तरह से प्रचारित किया गया कि मानों वे धक्के देकर बाहर किये गये। लेकिन ऐसा था नहीं दरअसल यहां छत्रपाल सिंह ने बड़ी राजनीतिक चाल चली है। हकीकत यह रही है कि शंकरलाल तिवारी हवाईअड्डे पर अंदर जा ही नहीं रहे थे। लेकिन यहां कुछ नेताओं और पत्रकारों को बाहर ला रहे पुलिस अधिकारी को समझाइश दे रहे शंकरलाल तिवारी के बीच में छत्रपाल सिंह छत्तू ने पुलिस अधिकारी को यह कह दिया कि "अंदर जो खड़े हैं वो तुम्हारे बाप हैं..." यह सुन अधिकारी नाराज हो गया। इसके बाद बहस बढ़ती गई। पुलिस अधिकारी भी तमतमा गया इसी तमतमाहट के बीच वह सभी को बाहर लाता जा रहा था और इसी के साथ शंकरलाल भी स्वयं ही बाहर आ गये। यहां छत्रपाल सिंह ने बड़ी कूटनीतिक रणनीति खेली और यह प्रचारित किया कि शंकरलाल को बाहर किया गया। इससे इन दिनों गणेश सिंह से छत्तू की चल रही दूरी को उसने शंकरलाल के बहाने भुनाया। हमें भेजे मेल में बताया गया है कि उधर विधायक शंकरलाल को यह बताया गया है यह सब सांसद गणेश सिंह के कहने पर हुआ है। इससे गणेश शंकर का शीतयुद्ध और गहरा गया है। और फायदा दोनों के विरोधियों का हुआ है। यहां यह भी बताया गया है कि आखिर एसपी यादव किस के कहने पर यह सफाई दे रहे हैं कि भोपाल से जिनकी सूची भेजी गई थी उन्हें ही अन्दर जाने दिया गया। यहां भी जातिवाद को मदद की बात बताई जा रही है।
2. घट गया भोजनः
सांसद गणेश सिंह जो इन दिनों करोड़ों के मालिक हैं जिनके गोवा व हिमाचल प्रदेश में अपने बिजनेस तैयार हैं उनके यहां शादी में एक घंटे तक आगंतुकों को भोजन न मिलना एक बड़ी साजिश है। हमें भेजे मेल में बताया गया है कि यहां भोजन की कमी एक सोची समझी साजिश का नतीजा रही है। इसमें कहा जा रहा है कि भोजन की व्यवस्था वहां एक यादव को दी गई थी जो कुटिल राजनीतिज्ञ माने जाने वाले लक्ष्मी यादव का खास आदमी माना जाता है तथा एक स्कूल संचालक अग्रवाल को निगरानी में रखा गया था। इन लोगों ने किसी एक के इशारे पर पूरी व्यूह रचना के साथ खाने में साजिश रची जिसका नतीजा एक घंटे तक खाना न मिलना रहा। इस वजह से आम लोग तो खान नहीं पाये व बिना खाये चले गये कई व्हीआईपी भी होटल में अपना भोजन लिया।
3. सरकारी कार्यक्रम का दुष्प्रचारः
मुख्यमंत्री भी इस शादी में शामिल होने आये थे। चूंकि वे वायुयान से आ रहे थे इस लिये जिला प्रसाशन को स्थानीय स्तर पर एक सरकारी कार्यक्रम रखना मजबूरी थी। उसकी तैयारी उसने रामपुर बाघेलान क्षेत्र में कर रखी थी लेकिन इसका कोई प्रचार प्रसार नहीं था। यह एक प्रशासन की तैयारी थी। इसे छत्रपाल सिंह द्वारा दूसरे तरीके से प्रकट कर ऐसा माहौल बनाया गया कि प्रशासन भी परेसान हो गया जिसका असर शादी की माहौल में पड़ा।
इसके अलावा तीन और बिन्दु हमें मेल किये गये हैं जिनकी प्रमाणिकता अभी नहीं मिल सकी है इस लिये उसे प्रकाशित नहीं कर रहे हें।

Thursday, December 16, 2010

विश्वतारा दूसरे राज से हटाए गये

राज एक्सप्रेस भोपाल में डेस्क एडीटर के तौर पर पदस्थ विश्वतारा दूसरे को राज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। हमें भेजे मेल में बताया गया है कि विगत कई महीनों से इनके द्वारा वहां कार्य में रुचि नहीं ली जा रही थी साथ ही अपने स्तर पर अखबारी राजनीति में लिप्त रहे। इसकी भनक राज प्रबंधन को लगी तो इन्हें इनके मूल एडीटोरियल से हटाते हुए विज्ञापन सेक्शन में भेज दिया गया और इन्हें जबलपुर रीजन का प्रभारी बनाते हुए इतना टारगेट तय कर दिया गया कि उतना संभव नहीं था। इन स्थितियों के मद्देनजर यह माना जाने लगा था कि विश्वतारा की छुट्टी राज से तय है। हालांकि वहां से इस घटना के बाद बगैर सूचना के सतना पहुंचे विश्वतारा दूसरे के वापस राज न पहुंचने पर उनको हटा दिया गया है। मेल में बताया गया है कि श्री दूसरे पहले सतना में जागरण के ब्यूरो चीफ रहे हैं तब एक महिला सहकर्मी के संबंधों को लेकर तथा शराबखोरी के चलते काफी विवादित रहे हैं।

Monday, November 29, 2010

नहीं मिली अधिमान्यता

हमें भेजे मेल में बताया गया है कि nd tv ke reporter gyan shukla ko nahi mili adhimanyata. jila stariya adhimanyata ke liye gyan shukla ko us samaya ghatka laga jab graduation ki degree na hone par adhimanyata ka farm nirast kar diya gaya.gyan sabhi ko graduation ke saath be kai degree hone ka dhaus dikhate the.isi baat ko lekar hi pro maravi se vivad hua tha mamla thane gaya tha.wahi nitin gurudev sahara v sanjay lohani ko adhimanata mil gaye hai