प्रति,
श्री संपादक महोदय
xxxxxxx सतना
विषय - आपके द्वारा xxxxxxx संबंध में ।
विषयांतर्गत लेख है कि xxxxx मामले को ठंडे बस्तें में डाल दिया गया ।
जैसा कि मुझे पूर्व से विदित है कि xxxxx जो कि बिकाऊ नही है अतः मुझे यह अहसास हुआ कि इस मामले की जानकारी आपको देनी चाहिये जिससे आप लोगो तक सच्चाई पहुॅचा सकें ।
मिडिया के आड में xxxxx के द्वारा xxxxx व xxxx के माध्यम से शहर के व्यापारियो से जबरन उगाही का धंधा किया जा रहा है ।
अपने आप को शहर के गणमान्य नागरिको में गिनने वाले xxxxx के द्वारा पूर्व में पंजाब एण्ड सिंध बैंक से लगभग 10 लाख का लोन लिया गया बाद में अपनी असली नियत दिखते हुये हजम कर लिया गया । जो कि आज भी बैंक द्वारा भगोडे घोसित है ।
xxxxx के xxxx के द्वारा अपने पद में रहते हुये बिरला फैक्ट्री में करोडो रूपये का हेरफेर किया गया जिसकी जांच आज भी माननीय न्यायालय में लंबित है ।
xxxxx के द्वारा अपने आप को समाजवादी पार्टी के नेता कहलाने वाले xxxxxx के साथ मिलकर आजकल फर्जी जमीन का कारोबार किया जा रहा है , इसी तरह की एक जमीन सतना नदी पुल के बगल में है जिसकी रजीस्ट्री पूर्व में ही किसी के नाम से है बाद में फर्जी तरीके से इसी जमीन की रजीस्ट्री राजनैतिक व मिडिया की धांैस जमाकर अपने साथियो के नाम पर करा दी गई ।
xxxxx के तथाकथित पार्टनर xxxxxx के द्वारा फर्जी मार्कसीट व फर्जी दस्तावेजो के आधार पर सुबोध मेनन जो कि मूलतः महाराष्ट्र (मुंबई) का रहने वाला है का पिस्टल का लाइसेंस असंवैधानिक तरीके से बनवाया गया ।
xxxxx के द्वारा पूर्व में अस्था बी.एड. कालेज के मालिक को किडनैप करवाकर उसके साथ मारपीट कर उससे कालेज की संपत्ति व कालेज को अपने हितग्राहियो के नाम करवाया गया ।
एक शुभौक्षुक
Sunday, March 25, 2012
अखबार की आड़ में कारोबार
हमें एक मेल प्राप्त हुआ है उसे यथा प्रकाशित किया जा रहा है। इसमें कुछ नामों को सत्यता पुष्टि न होने के कारण छिपाया जा रहा है-
Friday, March 2, 2012
प्रिज्म सीमेन्ट का सेलो गिरा, यूनिट २ का काम ठप
सतना के रामपुर बाघेलान के समीप मनकहरी स्थित प्रिज्म सीमेन्ट कंपनी को लंबा नुकसान झेलना पड़ा है। इन नुकसान के साथ ही कंपनी की यूनिट क्रमांक 2 का कामकाज भी ठप हो गया है जो अगले 6 महीने तक बंद ही रहेगा। इस घटना से कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ है। 6 माह तक उत्पादन न होने से अप्रत्यक्ष रूप से और करोड़ों की हानि हुई है। इससे पहले भी यह सेलो निर्माण के समय गिर गया था और तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद शुरू हुए निर्माण के बाद तकनीकि खामी रह गई थी। 2 मार्च को यहां काम चल रहा था कि दोपहर अचानक सेलो में दरारें आनी शुरु हो गई। हालात नाजुक होते देख कंपनी प्रबंधन सकते में आ गया। इसी दौरान सेलो के गिरे मलबे से 3 लोगों के घायल होने की खबर है।
शुरुआत में 18 हजार टन वजनी सेलो पीसा की झुकी हुई मीनार की तरह झुका हुआ था। हालात देखते हुए कंपनी ने यहां से लोगों को हटा लिये। देर रात 12 बजे के लगभग पूरा सेलो भरभरा का गिर गया। इस दौरान कोई जन हानि नहीं हुई है। लेकिन जो 4 लोग शुरुआती दौर में घायल हुए हैं वे कहां है और किस हाल में इसकी जानकारी को छुपाने लंबा मैनेजमेंट किया जा रहा है। अखबारों और न्यूज चैनलों में भी खरीद फरोख्त हुई है।
बिकाऊ हुई सतना की पत्रकारिता
सतना शहर का मीडिया बिक चुका है इसका प्रमाण इस घटना से मिल रहा है। चंद रुपयों के खातिर अपना जमीर बेचने वाले पत्रकार और प्रबंधन इतने भी नीचे चले जायेंगे यह शायद सतना में ही होता है। हद तो तब हो गई कि चंद नोटों के नीचे आकर इन लोगों ने खबर की खबर को हजम कर लिया। जबकि खबर तो दी जा सकती थी। बहरहाल मरे मीडिया जगत में इसी लिये तो उनकी औकात कुत्तों की तरह होती जा रही है कि जो भी आता है दो रोटी डाल देता है या फिर ज्यादा भोंके तो मार देता है। बनो कुत्ते...
Sunday, February 26, 2012
धन्यवाद भास्कर, जन सरोकार के लिये
इन दिनों सतना शहर में सीमेन्टेड सड़कों के उपर
डामर बिछाया जा रहा है। दो तीन साल पहले 20 साल की गारंटी पर नगर निगम द्वारा
बनवाई गई इस सीमेन्ट-कांक्रीट सड़कों की हालत अभी बेहतर है लेकिन इसके उपर एक बार
फिर से डामर बिछाने को महज पैसे का दुरुपयोग ही माना जा सकता है वह भी तब जब शहर
की आधे से ज्यादा सड़कों को अभी पक्का या डामरीकृत होने का इंतजार है। लेकिन कुछ
ठेकेदार व महापौर की मिलीभगत से हो रहे इन कामों को दैनिक भास्कर ने जिस तरीके से
सामने लाने का साहस किया है उससे यह तो अब साबित होने लगा है कि यह अखबार सतना शहर
के जन सरोकारों का सही हितैषी है। नारेबाजी में अपने आपको जन सरोकारी कहने वालों
की चुप्पी पर जनता की नजर तो है ही लेकिन अब शहर की जनता को भास्कर से ही आशा है
कि शायद वह बाईपास शहर वासियों को दिला सकेगा।
शहर की जनता ने जिस तरीके से पुष्कर सिंह तोमर को महापौर के रूप में देखा था अब वही जनता इन दिनों नगर निगम में होने वाले कामों से आजिज नजर आ रही है। कागजी व दिखावे के विकास में ज्यादा रुचि दिखाने के कारण महापौर की शहर वासियों के बीच उनकी निगेटिव छवि बन रही है।
Friday, February 24, 2012
विश्वतारा दूसरे ने स्टार समाचार में दी आमद
Tuesday, February 21, 2012
देवेन्द्र नगर में गिरफ्तार हुआ पत्रकार का बेटा
अपने साथियों के साथ खजुराहों से लौट रहे नई दुनिया के पत्रकार के बेटे को देवेन्द्रनगर में रुकना तब महंगा पड़ गया जब उनकी हरकतों की वजह से स्थानीय पुलिस ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया। अपने साथियों के साथ खजुराहों की रंगीनियत देखने के बाद वापस लौट रहे थे तो नशे में ये लोग देवेन्द्रनगर में रुक गये। यहां इन्होंने जो भी किया हो उसकी सूचना जब पुलिस को मिली तो पुलिस ने पत्रकार पुत्र सहित सभी साथियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में पत्रकारीय रिश्तों की बदौलत पुलिस इन्हे छोड़ा है। देवेन्द्रनगर रेड लाइट एरिया(बेड़िनियों) के रूप में कुख्यात है।
Friday, February 17, 2012
दैनिक भास्कर के मालिकाना विवाद में अजय अग्रवाल कोर्ट पहुंचे
दैनिक भास्कर के खिलाफ प्रकाशन और मालिकाना हक से संबंधित फर्जी घोषणापत्र के मामले में १५ फरवरी बुधवार को न्यायालय में सुनवाई हुई।पिछली सुनवाई के दौरान प्रकरण से संबंधित मूल दस्तावेज पेश नहीं किये गये थे। इस पर न्यायालय ने दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपि सौपने के निर्देश दिये थे। इस सुनवाई में सतना से अजय अग्रवाल भी शामिल हुए हैं।
घोषणा पत्र के मामले में जबलपुर के पूर्व कलेक्टर भागीरथ प्रसाद की ओर से जारी आदेश और रिकार्ड के मूल दस्तावेज न्यायालय में पेश किये जाने है। लेकिन इसकी मूल फाइल नहीं मिल रही।
भोपाल के अजय झा तथा कलिनायक के प्रकाशक संजीव जैन व प्रेम जैन ने ११ नवंबर को प्रेस रजिस्ट्रेशन एवं बुक एक्ट १८६७ की धारा ८बी के तहत दैनिक भास्कर के प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल, संचालक अजय अग्रवाल, सीएमडी कैलाश अग्रवाल, संचालक राकेश अग्रवाल तथा प्रकाश अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट में आवेदन पेश किया था। जिसमें दैनिक भास्कर के घोषणा पत्रों को निरस्त करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने २५ नवंबर को जिला दण्डाधिकारी को मामले का आठ माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिये है। इसी आदेश के आधार पर यह कार्यवाही चल रही है।
घोषणा पत्र के मामले में जबलपुर के पूर्व कलेक्टर भागीरथ प्रसाद की ओर से जारी आदेश और रिकार्ड के मूल दस्तावेज न्यायालय में पेश किये जाने है। लेकिन इसकी मूल फाइल नहीं मिल रही।
भोपाल के अजय झा तथा कलिनायक के प्रकाशक संजीव जैन व प्रेम जैन ने ११ नवंबर को प्रेस रजिस्ट्रेशन एवं बुक एक्ट १८६७ की धारा ८बी के तहत दैनिक भास्कर के प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल, संचालक अजय अग्रवाल, सीएमडी कैलाश अग्रवाल, संचालक राकेश अग्रवाल तथा प्रकाश अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट में आवेदन पेश किया था। जिसमें दैनिक भास्कर के घोषणा पत्रों को निरस्त करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने २५ नवंबर को जिला दण्डाधिकारी को मामले का आठ माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिये है। इसी आदेश के आधार पर यह कार्यवाही चल रही है।
Tuesday, February 7, 2012
स्टार समाचार, नगर निगम और रिपोर्टर का ठेका
जिले में स्टार समाचार ने आते ही जिस तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है वह न केवल अखबार की बेहतर नीति रीति का नतीजा है लेकिन इसके पीछे भी एक और नीति चली वह रही है यहां के कुछ लोगों की स्व-महत्वाकांक्षा। अखबार के कंधे पर बंदूक रखकर अपना हित साधने वालों ने दिखाने के लिये तो अखबार का फायदा किया लेकिन हकीकत कुछ और रही है। नगर निगम के मुखपृष्ट बने स्टार समाचार की बात पोस्टमार्टम पहले ही कर चुका है विगत दिवस सेमरिया एक्सप्रेस ने भी इसके रिपोर्टर की तथाकथा उजागर की है। स्टार समाचार के रिपोर्टर महेन्द्र पाण्डेय स्टार समाचार के नाम से कमाई करने में जुटे हैं। इंजीनियरों
राज एक्सप्रेस से तीन साल पहले पत्रकारिता में आने वाले महेन्द्र ने अखबार को अपनी कमाई का जरिया बनाया जो आज भी जारी है।
पत्रकारिता के दम पर अपनी रामकहानी लिखने वाले पत्रकारों में एसा ही एक दूसरा नाम संजय लोहानी का है। जब ये सतना आये थे तो इनकी स्थिति क्या थी किसी से नहीं छिपी है। लेकिन पत्रकारिता की ब्लैकमेलिंग से इन्होंने यहां अपना काला कारोबार शुरू किया और आज जमीन के धंधे के साथ ट्रक संचालन में जुटे हैं। पत्रकारिता की आड़ में मैहर सीमेन्ट में इन्होंने अपने ट्रक लगा रखे हैं। इसी तरह सतना सीमेन्ट में भी
इन्होंने काफी प्रयास किया था लेकिन सफल न होने पर इन्होंने यहां की काफी खबर दिखाई थी।
Thursday, October 27, 2011
बिरला सीमेन्ट और ननि पर विजिलेंस का छापा
Sunday, October 23, 2011
श्री कृष्ण माहेश्वरी की नवंबर में संघ पद से विदाई तय
रामवन को लेकर चर्चा में रहने वाले श्री कृष्ण माहेश्वरी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और दखलंदाजी को लेकर संघ में स्थानीय स्तर पर ही असंतोष बढ़ गया है। उधऱ रामवन के कार्यक्रम में जब संघ प्रमुख मोहन भागवत आये थे तब भी श्री कृष्ण माहेश्वरी के खिलाफ काफी शिकायतें की गई थी। इसको लेकर संघ में पदाधिकारी की हैसियत से इनकी छुट्टी को तय माना जा रहा है। यह बात खुद माहेश्वरी जी भी समझ रहे है और अपनी राजनीतिक चाहत पूरी करने की जुगत में जुड़ गये हैं।श्री माहेश्वरी अब राज्य सभा में अपना दाव आजमाना चाह रहे हैं और इसके लिये वे काफी परेशान भी हैं। श्री कृष्ण माहेश्वरी को संघ ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया है तथा नवम्बर में क्षेत्रीय प्रमुख पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद इससे भी उनका हटना तय माना जा रहा है। राज्य सभा के लिये माहेश्वरी ने उमा भारती से भी सहयोग चाहा है। इन दिनों इनके सहयोगी की भूमिका में लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह, महापौर पुष्कर सिंह, पूर्व पार्षद धर्मेन्द्र सिंह घूरडांग शामिल हैं।
यदि बात सतना और रीवा जिले की करें तो श्री कृष्ण माहेश्वरी की कार्यप्रणाली से संघ का निचला कार्यकर्ता तो नाराज है ही साथ यहां के अन्य पदाधिकारी भी खुश नहीं हैं। संघ में परिवारवाद को महत्व दे रहे श्री माहेश्वरी से भाजपा में भी असंतोष है तो सांसद भी इनसे ज्यादा सहमत नजर नहीं आते हैं।
यदि बात सतना और रीवा जिले की करें तो श्री कृष्ण माहेश्वरी की कार्यप्रणाली से संघ का निचला कार्यकर्ता तो नाराज है ही साथ यहां के अन्य पदाधिकारी भी खुश नहीं हैं। संघ में परिवारवाद को महत्व दे रहे श्री माहेश्वरी से भाजपा में भी असंतोष है तो सांसद भी इनसे ज्यादा सहमत नजर नहीं आते हैं।
Thursday, October 20, 2011
श्री कृष्ण माहेश्वरी का रामवन में नया पैंतरा
| जिनके नाम से रामवन है वहां के विकास की कहानी कहता घटिया सा शेड जबकि दूसरी ओर व्यावसायिकता व विलासिता संबधी निर्माण में लाखों खर्च कर दिये गये। |
अब जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार कलेक्टर पर इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि इस राशि के कामों की निर्माण एजेंसी मानस संघ रामवन को ही बनाया जाये। साथ ही जल्द ही प्रशासकीय स्वीकृति दी जाये। मजे की बात है कि शासन की अपनी कई निर्माण एजेंसियां मसलन लोक निर्माण विभाग, आरईएस, हाउसिंग बोर्ड हैं लेकिन इनको निर्माण एजेंसी न बना कर निजी संस्था मानस संघ को निर्माण एजेंसी बनाने के पीछे की वजह स्पष्ट है। क्योंकि इससे जो भी लाभ होगा वह मानस संघ यानि की श्री कृष्ण माहेश्वरी को ही होगा। इससे जहां मानस संघ यह भी कह सकेगा का सारा विकास उसने कराया और बचत राशि भी उसकी झोली मे।
जबकि यदि श्री कृष्ण माहेश्वरी व उनका मानस संघ यदि इतना ही ईमानदार है तो वह यह काम शासकीय एजेंसी से कराता और उसकी मानीटरिंग स्वयं करता तो इससे उनकी सद् नीयत झलकती लेकिन यहां तो पैसा खाने का खेल चल रहा है। और पहली खेप में 50 लाख पर श्री कृष्ण माहेश्वरी की नजर है। संभावना है कि कलेक्टर मानस संघ को निर्माण एजेंसी बनाने के लिये अपनी सहमति भी दे देंगे।
Saturday, October 15, 2011
अपने ही दामन पर धब्बे लगा कर खुश होते सतना मीडिया की विश्वसनीयता दांव पर
सतना के मीडिया जगत में इन दिनों खुशी का माहौल है। यह मीडिया इस बात पर खुश हो रहा है कि उसने भाजपा की कान्फ्रेंस में बंटे नोट को नेशनल लेबल पर हाइलाइट करके बड़ी जीत हासिल की है साथ ही उसने खुद को बड़ा ईमानदार दिखाने की कोशिश की है लेकिन जहां से हम खड़े होकर देख रहे हैं वहां से सतना मीडिया सब कुछ हार चुका है। उसकी पहली और बड़ी हार उसकी अपनी विश्वसनीयता है। दूसरी हार जिसे मीडिया ने कैश फार कव्हरेज का नाम दिया है उसने अपना सस्ता पन बताया है, तीसरी हार उसका अपना दिल है जिसमें यह वही जानता है कि यह नोट कव्हरेज के लिये थे या गिफ्ट के स्थान पर उपहार स्वरूप और चौथी हार उसकी वह नासमझी और बेचारगी जिसमें वह किसी की साजिश का हथियार बना। कुल मिला कर इस पूरी कहानी में सतना मीडिया का हाल वही रहा कि 'न खुदा ही मिला न ही विसाले सनम'
आएं इस हार का विश्लेषण करे तो इस घटना में जो विश्वसनीयता घटी है उसमें अब इस घटना के बाद पत्रकारों का विश्वास सहज तरीके से कोई नहीं मानेगा। मजा तो तब आता जब ये पत्रकार वहीं पर लिफाफे वापस करते और उस कान्फ्रेंस की एक भी खबर न लिखते और फिर लिखते की उन्हें पैसे दिये गये। लेकिन जिस तरीके से किया उससे वे खुद ही संदिग्ध हो गये हैं।
दूसरी हार जिसे कैश फार कव्हरेज का नाम दे रहे हैं उससे यह मैसेज स्पष्ट जा रहा है कि सतना के मीडिया को मैनेज करना कितना सरल है कि वह 5 सौ में बिक जाता है या उसे खरीदा जा सकता है।जबकि यदि मीडिया को यह कहना ही था वे यह कह सकते थे कि उन्हें गिफ्ट में नोट दिये गये जिससे मीडिया हल्का न होता बल्कि भाजपा हल्की होती और यही हकीकत भी थी।
आडवाणी की यात्रा के बेहतर कव्हरेज के लिये नोट देने की बात कही जा रही है तो कई लोगों से बात के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि उस पत्रकार वार्ता में कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि आपको बेहतर कव्हरेज के लिये यह राशि दी जा रही है। यह अलग बात है कि यहां गिफ्ट न देकर पत्रकारों को नोट दिये गये। हालांकि इसके पीछे की साजिश आगे बताएंगे।
अब आते है इस कान्फ्रेंस के पीछे की कहानी पर जो हमें मेल करके बताई गई है। इसकी सत्यता पर हमारी भी पड़ताल चल रही है।
यह पूरा खेल एक साजिश के तहत खेला गया और इसके मोहरा बना सतना का मीडिया।यह पूरा खेल सांसद गणेश सिंह को बदनाम करने के लिये खेला गया और इस खेल में भाजपा के जिलाध्यक्ष, सूर्यनाथ सिंह गहरवार, लक्ष्मी यादव, महापौर और कुछ पत्रकार।
दरअसल सांसद का कद इन दिनों जिले में सबसे बड़ा है साथ ही इस यात्रा का पूरा जिम्मा उन्होंने अपने कंधे पर ले लिया। यह यात्रा का जिम्मा जैसे ही सांसद ने लिया पार्टी के लोगों को यह लगा कि उन्होंने जन चेतना यात्रा को हाइजैक कर लिया है। इससे नाराज पार्टी के कुछ लोगों ने यह साजिश रची।
इसके लिये पत्रकार वार्ता को औजार बनाया गया। इसमें जानबूझ कर जिलाध्यक्ष ने मंत्री को बुलाया और सांसद को बुलाया जबकि सांसद की कान्फ्रेंस पहले हो चुकी थी। इस गैर जरूरी कान्फ्रेंस में जानकर नोट बांटे गये। इसमें से कुछ राशि पार्टी के खाते से खर्च हुई और कुछ राशि लक्ष्मी यादव के यहां से पहुंची। नोट बंटने के बाद इस साजिश में शामिल पत्रकार चौकन्ना को सक्रिय किया गया(चौकन्ना जी की इन दिनों गणेश सिंह से बन नहीं रही है क्योंकि उनके कुछ काम करने से गणेश सिंह ने मना कर दिया था) चौकन्ना ने पर्दे से यह खबर नेजा में छपवाई। इसके बाद अरविन्द मिश्रा को विज्ञापन की गणित के नाम से इसमें शामिल किया गया। जबकि अरविन्द मिश्रा का कलेवर पहले से ही स्पष्ट था कि वे कुछ सकारात्मक नहीं कर रहे हैं। यहां उनकी स्टाइल उसी तरह दिखी जैसे कभी शिवेन्द्र सिंह ने चुनाव के समय होस्ट मैरिज हाल में सांसद गणेश सिंह से दिखाया था। सो यह तय था कि यह होगा। उधर स्टार समाचार की सांसद व मंत्री विरोधी मुहिम ने आग में घी का काम किया और साजिश अपने अंजाम तक पहुंच गई।
हालांकि इस साजिश में सांसद की भद्द पिटनी थी लेकिन बात तब बिगड़ गई जब मामला साजिश कर्ता अखबारी लोगों के हाथ से फिसल गया। और मजबूरी में उन्हें अपनी ईमानदारी साबित करने मामला नेशनल मीडिया को देना पड़ा। और सतना मीडिया अपनी बेवकूफी को ईमानदारी साबित करने में जुटा रहा वो भी दूसरे का औजार बन कर।
हालांकि इस पूरे खेल का सूत्रधार जिलाध्यक्ष स्टोरी से अलग बचता रहा और इसमें बेचारे श्यामलाल को बली का बकरा बना दिया गया जबकि उसका कोई दोष नहीं है।
आएं इस हार का विश्लेषण करे तो इस घटना में जो विश्वसनीयता घटी है उसमें अब इस घटना के बाद पत्रकारों का विश्वास सहज तरीके से कोई नहीं मानेगा। मजा तो तब आता जब ये पत्रकार वहीं पर लिफाफे वापस करते और उस कान्फ्रेंस की एक भी खबर न लिखते और फिर लिखते की उन्हें पैसे दिये गये। लेकिन जिस तरीके से किया उससे वे खुद ही संदिग्ध हो गये हैं।
दूसरी हार जिसे कैश फार कव्हरेज का नाम दे रहे हैं उससे यह मैसेज स्पष्ट जा रहा है कि सतना के मीडिया को मैनेज करना कितना सरल है कि वह 5 सौ में बिक जाता है या उसे खरीदा जा सकता है।जबकि यदि मीडिया को यह कहना ही था वे यह कह सकते थे कि उन्हें गिफ्ट में नोट दिये गये जिससे मीडिया हल्का न होता बल्कि भाजपा हल्की होती और यही हकीकत भी थी।
आडवाणी की यात्रा के बेहतर कव्हरेज के लिये नोट देने की बात कही जा रही है तो कई लोगों से बात के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि उस पत्रकार वार्ता में कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि आपको बेहतर कव्हरेज के लिये यह राशि दी जा रही है। यह अलग बात है कि यहां गिफ्ट न देकर पत्रकारों को नोट दिये गये। हालांकि इसके पीछे की साजिश आगे बताएंगे।
अब आते है इस कान्फ्रेंस के पीछे की कहानी पर जो हमें मेल करके बताई गई है। इसकी सत्यता पर हमारी भी पड़ताल चल रही है।
यह पूरा खेल एक साजिश के तहत खेला गया और इसके मोहरा बना सतना का मीडिया।यह पूरा खेल सांसद गणेश सिंह को बदनाम करने के लिये खेला गया और इस खेल में भाजपा के जिलाध्यक्ष, सूर्यनाथ सिंह गहरवार, लक्ष्मी यादव, महापौर और कुछ पत्रकार।
दरअसल सांसद का कद इन दिनों जिले में सबसे बड़ा है साथ ही इस यात्रा का पूरा जिम्मा उन्होंने अपने कंधे पर ले लिया। यह यात्रा का जिम्मा जैसे ही सांसद ने लिया पार्टी के लोगों को यह लगा कि उन्होंने जन चेतना यात्रा को हाइजैक कर लिया है। इससे नाराज पार्टी के कुछ लोगों ने यह साजिश रची।
इसके लिये पत्रकार वार्ता को औजार बनाया गया। इसमें जानबूझ कर जिलाध्यक्ष ने मंत्री को बुलाया और सांसद को बुलाया जबकि सांसद की कान्फ्रेंस पहले हो चुकी थी। इस गैर जरूरी कान्फ्रेंस में जानकर नोट बांटे गये। इसमें से कुछ राशि पार्टी के खाते से खर्च हुई और कुछ राशि लक्ष्मी यादव के यहां से पहुंची। नोट बंटने के बाद इस साजिश में शामिल पत्रकार चौकन्ना को सक्रिय किया गया(चौकन्ना जी की इन दिनों गणेश सिंह से बन नहीं रही है क्योंकि उनके कुछ काम करने से गणेश सिंह ने मना कर दिया था) चौकन्ना ने पर्दे से यह खबर नेजा में छपवाई। इसके बाद अरविन्द मिश्रा को विज्ञापन की गणित के नाम से इसमें शामिल किया गया। जबकि अरविन्द मिश्रा का कलेवर पहले से ही स्पष्ट था कि वे कुछ सकारात्मक नहीं कर रहे हैं। यहां उनकी स्टाइल उसी तरह दिखी जैसे कभी शिवेन्द्र सिंह ने चुनाव के समय होस्ट मैरिज हाल में सांसद गणेश सिंह से दिखाया था। सो यह तय था कि यह होगा। उधर स्टार समाचार की सांसद व मंत्री विरोधी मुहिम ने आग में घी का काम किया और साजिश अपने अंजाम तक पहुंच गई।
हालांकि इस साजिश में सांसद की भद्द पिटनी थी लेकिन बात तब बिगड़ गई जब मामला साजिश कर्ता अखबारी लोगों के हाथ से फिसल गया। और मजबूरी में उन्हें अपनी ईमानदारी साबित करने मामला नेशनल मीडिया को देना पड़ा। और सतना मीडिया अपनी बेवकूफी को ईमानदारी साबित करने में जुटा रहा वो भी दूसरे का औजार बन कर।
हालांकि इस पूरे खेल का सूत्रधार जिलाध्यक्ष स्टोरी से अलग बचता रहा और इसमें बेचारे श्यामलाल को बली का बकरा बना दिया गया जबकि उसका कोई दोष नहीं है।
Tuesday, October 11, 2011
माहेश्वरी का नया दलाली फण्डा
समाजसेवा के नाम पर संघ के पदाधिकारी श्रीकृष्ण माहेश्वरी दलाली में जुटे हुए है। हमेशा किसी एनजीओ को आगे करके लाखों का काला पीला करने का अपना जुगाड़ तय कर रहे हैं। इसके साथ ही अपने को नाना जी बताने में जुट जाते हैं। इनका फर्जीवाड़ा देखना हो तो आइये हम दिखाते हैं-
गरमी के मौसम में कलेक्टर सुखबीर सिहं ने जल संरक्षण के लिये वाटर हार्वेस्टिंग का अभियान प्रारंभ किया। यह शुरू हुआ नहीं कि दो चार अग्रवालों को जोड़कर एक संस्था रजिस्टर्ड करवाई और इसे पूरी गरमी वाटर हार्वेस्टिंग अभियान का दिखावा करने जोड़ दिया। जबकि यह संस्था सिर्फ अखबारों में ही ज्यादातर काम कर रही थी। मजे की बात हर कार्यक्रम में इनके माहेश्वरी की दुकान चलती दिखी।
अब उन्होंने एक नया काम खोजा है। जूता चप्पल हब बनाने का। फिर एक एनजीओ खोज कर अब वे जिले को जूते चप्पल बनाने का हब बनाने का दावा कर रहे हैं। मजे की बात देखिये यह काम सज्जनपुर में होगा और पूरा जिला हब कैसे बनेगा। यह समझ से परे हैं।
माहेश्वरी जी काम ही करना है तो उन्हें अवसर दिलाएं जो अभी वास्तव में जूते चप्पल बना रहे हैं उन्हें आगे आने के अवसर दिलाएं।
लेकिन नहीं वे सिर्फ ऐसे काम ही लेते हैं जहां से जिला पंचायत द्वारा मदद मिलती है क्योंकि इनका कोई हिसाब नहीं होता है।
गरमी के मौसम में कलेक्टर सुखबीर सिहं ने जल संरक्षण के लिये वाटर हार्वेस्टिंग का अभियान प्रारंभ किया। यह शुरू हुआ नहीं कि दो चार अग्रवालों को जोड़कर एक संस्था रजिस्टर्ड करवाई और इसे पूरी गरमी वाटर हार्वेस्टिंग अभियान का दिखावा करने जोड़ दिया। जबकि यह संस्था सिर्फ अखबारों में ही ज्यादातर काम कर रही थी। मजे की बात हर कार्यक्रम में इनके माहेश्वरी की दुकान चलती दिखी।
अब उन्होंने एक नया काम खोजा है। जूता चप्पल हब बनाने का। फिर एक एनजीओ खोज कर अब वे जिले को जूते चप्पल बनाने का हब बनाने का दावा कर रहे हैं। मजे की बात देखिये यह काम सज्जनपुर में होगा और पूरा जिला हब कैसे बनेगा। यह समझ से परे हैं।
माहेश्वरी जी काम ही करना है तो उन्हें अवसर दिलाएं जो अभी वास्तव में जूते चप्पल बना रहे हैं उन्हें आगे आने के अवसर दिलाएं।
लेकिन नहीं वे सिर्फ ऐसे काम ही लेते हैं जहां से जिला पंचायत द्वारा मदद मिलती है क्योंकि इनका कोई हिसाब नहीं होता है।
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