जिले का चर्चित इंजीनियरिंग कालेज है विट्स। पतेरी से होकर करही रोड जाने पर दाहिनी ओर भव्य अट्टालिकाओं और मनोहारी दृश्यों के बीच रचा बसा शिक्षा का यह केन्द्र अपने में कई प्रेम कहानियों और अवैध कृत्यों को समेटे हैं। इसमें जहां विद्यार्थियों की नादानियां भी शामिल हैं तो यहां के स्टाफ का छल व पिपासा भी। यहां के मालिकानों में से एक सेनानी से अपने संबंधों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाली तलाकशुदा महिला के अब नये संबंध यहां चर्चा का विषय बन रहे हैं। मस्त पार्टियों के लिये मशहूर यह महिला इन दिनों कालेज के एक शिक्षक पर कुछ ज्यादा मेहरबान है। सीडी सिंह जो कि एक विज्ञापन एजेंसी चलाने वाले के भाई है विट्स में पढ़ाने का काम करते हैं। पढ़ाने के साथ-साथ इनकी रुचि वहां के छात्रों के निजी मामलों में भी ज्यादा रहती है। ऐसे ही एक विवाद के मामले में सीडी ने एक छात्र की पक्ष की ओर से दूसरे छात्र को न केवल धमकाया बल्कि हाथ भी छोड़ दिया। यहां से माहौल बिगड़ने लगा था। छात्र एक जुट होने लगे थे और मौके की तलाश भी थी। उधर कैम्पस में यह भी चर्चा गरम थी कि आखिर एचआर ऋचा सिंह एक दूसरी दिशा में रहने वाले शिक्षक को क्यों अपनी कार में बैठाकर लगातार क्यों लाती और ले जाती हैं। हर विद्यार्थी यह दबी जुबान कहता है कि मैडम पेप्टेक सिटी में रहती हैं, सीडी सिंह राजेन्द्र नगर स्थित रामा बिहार कालोनी के पीछे स्थित कालोनी में। दोनों की निवास की दिशा पूरब पश्चिम है फिर साथ आना-जाना क्या है। हम मुंह का अपना मतलब है। कोई इसे प्रेम संबंध से जोड़ रहा है, कोई इसे दोस्ताना कह रहा है, कोई जूनियर स्टाफ पर मेहरबानी कोई महज सामान्य घटना।
लेकिन सीडी की मारपीट के बाद से नाराज छात्रों को एक हर्ष दायक खबर तब मिली जब उन्हें पता चला कि विट्स की एचआर ऋचा सिंह और प्रोफेसर सीडी सिंह एक साथ कार में निकलने वाले हैं। फिर क्या था फोन हुए, व्यवस्था हुई और भट्ठे के पास कार रोकने का प्रयास किया गया और उसके शीशे फोड़ डाले गये। वो तो ऋचा की दिलेरी थी कि उसने कार रोकी नहीं वरना सीडी सिंह की हालत कार के टूटे हुए शीशों की तरह होती।
कुल मिला कर इन दिनों कालेज में यह तथाकथित प्रेमकहानी हर छात्र छात्रा की जुबानी हैं। ऐसे कालेज में जहां स्टाफ की कहानियां सुनने को मिले वहां के माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह कहानी कितनी सही व कितनी गलत है यह तो विट्स प्रबंधन और एचआर व प्रोफेसर ही जानते होंगे लेकिन यह भी सच है कि बिना आग लगे धुंआ नहीं उठता है।
Saturday, May 19, 2012
Friday, May 18, 2012
धर्मेन्द्र सिंह हत्याकाण्ड- स्लेटी कलर की इंडिका में भागा था राजा
हमे भेजे गये मेल में बताया गया है कि बाबूपुर में हुए हत्याकाण्ड में चार लोग मरे हैं। जमीन को लेकर हुए विवाद में मरने वालों में एक पक्ष से भाजपा नेता व पूर्व पार्षद तथा इन दिनों संघ के श्रीकृष्ण माहेश्वरी का करीबी धर्मेन्द्र सिंह घूरडांग, उसके दो सगे भांजे बिप्पू सिंह और बिन्नू सिंह है। दूसरे पक्ष से मरने वाले में जगन कोल है।
मेल में बताया गया है कि जब बाबूपुर में खूनी संघर्ष हो रहा था उस वक्त वहां पर राजा भी था। उस दौरान उसके पास दो पिस्टल रही हैं। एक उसकी खुद की लाइसेंसी और दूसरी गैर लाइसेंसी। जब आदिवासियों ने राजा को देख लिया तो उसके पीछे भी भागे। हालात के मद्देनजर राजा ने वहां से दौड़ लगा दी। हालांकि इस दौरान राजा के हाथ व शरीर में कुछ डंडे पड़े हैं और कंधे के नीचे बांह में सूजन है। इस दौरान उसने अपने साथ रखी पिस्तौल से चार गोलियां भी दागी। हालांकि आदिवासियों ने उसका पीछा जारी रखा और सतना-अमरपाटन रोड आने तक राजा दौड़ता ही रहा। इसके बाद राजा ने एक बस रुकवाई और उसमें बैठकर भटनवारा तक आया। यहां पर वह उतर गया और ओर एक होटल में जाकर पनाह ली। इस दौरान तक वह सतना अपने साथियों को सूचित कर चुका था। इसके बाद एक एक स्लेटी कलर की इंडिका में उसे लेने एक मुसलमान पहुंचा था जिसके साथ राजा सतना पहुंचा।
घटना की वजह
घटना की शुरुआत बुधवार की रात से होती है। यहां पर रात से ही डामर रोड से लगी सरकारी जमीन पर स्थानीय आदिवासियों द्वारा कब्जे की नीयत से 50 से 60 की संख्या में लकड़ी के चार खंभे और ऊपर टटिया, प्लास्टिक, त्रिपाल आदि लगाकर झोपड़ा बनाते हैं। इसकी जानकारी गुरुवार को धर्मेन्द्र सिंह को होती है और वह गुरुवार की रात को अपने साथियों को भेज कर यहां की जमीन खाली करने की धमकी दिलवाता है। जिसमें कहाजाता है कि रात को यह जमीन खाली कर दो नहीं तो सुबह सब जला देंगे। इस दौरान वहां चार पांच हवाई फायर किये गये।
की बातचीत की तैयारी
धमकी से घबराये आदिवासियों ने रात में ही निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर ली। उन्होंने अपनी ओर से बातचीत के लिये जगन कोल को चुना। अगली सुबह पूरे लोग इक्कठा होकर वहीं सरकारी जमीन पर बैठ गये थे।
पहली गोली बिप्पू ने चलाई
रात की धमकी के बाद अगले दिन धर्मेन्द्र सिंह अपने भांजों व अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचा। इस दौरान पहुंचते ही उसने सरकारी जमीन में तनी कुछ झोपड़ियों में आग लगानी शुरु की तो वहां बैठे आदिवासी उसके पास आये जिसमें आगे जगन कोल था। इसके बाद इन लोगों ने ऐसा न करने की बात कही तो धर्मेन्द्र सिंह ने जगन को नेतागिरी न करने की धमकी के साथ गाली दी। इस दौरान बहस बढ़ती गई और आवेशित जगन का धीरज जवाब दे गया और उसने धर्मेन्द्र सिंह की कालर पकड़ ली। यह देखते ही पास खड़े बड़े भांजे दिप्पू ने जगन पर गोली चला दी। गोली लगते ही लगते ही जगन नीचे गिरा। इसके साथ ही हालात बेकाबू हो गये। भीड़ तंत्र हावी हो गया और सभी ने शहर के गुण्डों को घेर लिया। इस दौरान धर्मेन्द्र ने अपने बचाव में एक गोली चलाई जो उसकी आखिरी गोली थी इसके बाद उसे दूसरा फायर करने का मौका नहीं मिला औरपत्थर लाठियों की मार के बीच भागते भागते सड़क के किनारे की नाली में गिर पड़ा। फिर भी लोग तब तक मारते रहे जबतक वह मर नहीं गया। यही हश्र उसके दोनों भांजों का हुआ।
नीचे नहीं उतरा था ड्राइवर
इस पूरे घटनाक्रम में ड्राइवर स्कार्पियो में ही बैठा रहा। वह नीचे नहीं उतरा था। राजा इन लोगों से लगभग 30 फीट की दूरी पर खड़ा था। इसी दूरी पर अन्य लोग भी खड़े थे।
माहेश्वरी भी है जमीन के पार्टनर
मेल में बताया गया है कि यहां की जमीन के साइलेंट पार्टनर संघ के पदाधिकारी भी हैं। इन दिनों माहेश्वरी जमीनों और खदान के कारोबार में जुड़े हैं। ऐसे ही एक जमीन इनकी जोड़ी ने लखनवाह में भी ली है। यहां पर भी ऐसा ही विवाद तैयार हो रहा था और वहां पर भी खूनी खेल होता। संघ के नाम पर भाजपा के कंधे पर सवार यह माहेश्वरी इन दिनों जिले में जमीन का सबसे बड़ा काला कारोबारी है जो सामने से सफेदपोश बने है लेकिन इसके पीछे काफी काले धंधे हैं।
मेल में बताया गया है कि जब बाबूपुर में खूनी संघर्ष हो रहा था उस वक्त वहां पर राजा भी था। उस दौरान उसके पास दो पिस्टल रही हैं। एक उसकी खुद की लाइसेंसी और दूसरी गैर लाइसेंसी। जब आदिवासियों ने राजा को देख लिया तो उसके पीछे भी भागे। हालात के मद्देनजर राजा ने वहां से दौड़ लगा दी। हालांकि इस दौरान राजा के हाथ व शरीर में कुछ डंडे पड़े हैं और कंधे के नीचे बांह में सूजन है। इस दौरान उसने अपने साथ रखी पिस्तौल से चार गोलियां भी दागी। हालांकि आदिवासियों ने उसका पीछा जारी रखा और सतना-अमरपाटन रोड आने तक राजा दौड़ता ही रहा। इसके बाद राजा ने एक बस रुकवाई और उसमें बैठकर भटनवारा तक आया। यहां पर वह उतर गया और ओर एक होटल में जाकर पनाह ली। इस दौरान तक वह सतना अपने साथियों को सूचित कर चुका था। इसके बाद एक एक स्लेटी कलर की इंडिका में उसे लेने एक मुसलमान पहुंचा था जिसके साथ राजा सतना पहुंचा।
घटना की वजह
घटना की शुरुआत बुधवार की रात से होती है। यहां पर रात से ही डामर रोड से लगी सरकारी जमीन पर स्थानीय आदिवासियों द्वारा कब्जे की नीयत से 50 से 60 की संख्या में लकड़ी के चार खंभे और ऊपर टटिया, प्लास्टिक, त्रिपाल आदि लगाकर झोपड़ा बनाते हैं। इसकी जानकारी गुरुवार को धर्मेन्द्र सिंह को होती है और वह गुरुवार की रात को अपने साथियों को भेज कर यहां की जमीन खाली करने की धमकी दिलवाता है। जिसमें कहाजाता है कि रात को यह जमीन खाली कर दो नहीं तो सुबह सब जला देंगे। इस दौरान वहां चार पांच हवाई फायर किये गये।
की बातचीत की तैयारी
धमकी से घबराये आदिवासियों ने रात में ही निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर ली। उन्होंने अपनी ओर से बातचीत के लिये जगन कोल को चुना। अगली सुबह पूरे लोग इक्कठा होकर वहीं सरकारी जमीन पर बैठ गये थे।
पहली गोली बिप्पू ने चलाई
रात की धमकी के बाद अगले दिन धर्मेन्द्र सिंह अपने भांजों व अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचा। इस दौरान पहुंचते ही उसने सरकारी जमीन में तनी कुछ झोपड़ियों में आग लगानी शुरु की तो वहां बैठे आदिवासी उसके पास आये जिसमें आगे जगन कोल था। इसके बाद इन लोगों ने ऐसा न करने की बात कही तो धर्मेन्द्र सिंह ने जगन को नेतागिरी न करने की धमकी के साथ गाली दी। इस दौरान बहस बढ़ती गई और आवेशित जगन का धीरज जवाब दे गया और उसने धर्मेन्द्र सिंह की कालर पकड़ ली। यह देखते ही पास खड़े बड़े भांजे दिप्पू ने जगन पर गोली चला दी। गोली लगते ही लगते ही जगन नीचे गिरा। इसके साथ ही हालात बेकाबू हो गये। भीड़ तंत्र हावी हो गया और सभी ने शहर के गुण्डों को घेर लिया। इस दौरान धर्मेन्द्र ने अपने बचाव में एक गोली चलाई जो उसकी आखिरी गोली थी इसके बाद उसे दूसरा फायर करने का मौका नहीं मिला औरपत्थर लाठियों की मार के बीच भागते भागते सड़क के किनारे की नाली में गिर पड़ा। फिर भी लोग तब तक मारते रहे जबतक वह मर नहीं गया। यही हश्र उसके दोनों भांजों का हुआ।
नीचे नहीं उतरा था ड्राइवर
इस पूरे घटनाक्रम में ड्राइवर स्कार्पियो में ही बैठा रहा। वह नीचे नहीं उतरा था। राजा इन लोगों से लगभग 30 फीट की दूरी पर खड़ा था। इसी दूरी पर अन्य लोग भी खड़े थे।
माहेश्वरी भी है जमीन के पार्टनर
मेल में बताया गया है कि यहां की जमीन के साइलेंट पार्टनर संघ के पदाधिकारी भी हैं। इन दिनों माहेश्वरी जमीनों और खदान के कारोबार में जुड़े हैं। ऐसे ही एक जमीन इनकी जोड़ी ने लखनवाह में भी ली है। यहां पर भी ऐसा ही विवाद तैयार हो रहा था और वहां पर भी खूनी खेल होता। संघ के नाम पर भाजपा के कंधे पर सवार यह माहेश्वरी इन दिनों जिले में जमीन का सबसे बड़ा काला कारोबारी है जो सामने से सफेदपोश बने है लेकिन इसके पीछे काफी काले धंधे हैं।
Friday, April 20, 2012
नेहरू और संन्यासिन का प्रेम
नेहरू का संन्यासिन से प्रेम पर मथाई ने पृष्ठ क्रमांक 206 में खुल कर लिखा है।
Reminiscences of the Nehru Age by M O Mathai Part 2of2
Reminiscences of the Nehru Age by M O Mathai Part 2of2
Sunday, March 25, 2012
अखबार की आड़ में कारोबार
हमें एक मेल प्राप्त हुआ है उसे यथा प्रकाशित किया जा रहा है। इसमें कुछ नामों को सत्यता पुष्टि न होने के कारण छिपाया जा रहा है-
प्रति,
श्री संपादक महोदय
xxxxxxx सतना
विषय - आपके द्वारा xxxxxxx संबंध में ।
विषयांतर्गत लेख है कि xxxxx मामले को ठंडे बस्तें में डाल दिया गया ।
जैसा कि मुझे पूर्व से विदित है कि xxxxx जो कि बिकाऊ नही है अतः मुझे यह अहसास हुआ कि इस मामले की जानकारी आपको देनी चाहिये जिससे आप लोगो तक सच्चाई पहुॅचा सकें ।
मिडिया के आड में xxxxx के द्वारा xxxxx व xxxx के माध्यम से शहर के व्यापारियो से जबरन उगाही का धंधा किया जा रहा है ।
अपने आप को शहर के गणमान्य नागरिको में गिनने वाले xxxxx के द्वारा पूर्व में पंजाब एण्ड सिंध बैंक से लगभग 10 लाख का लोन लिया गया बाद में अपनी असली नियत दिखते हुये हजम कर लिया गया । जो कि आज भी बैंक द्वारा भगोडे घोसित है ।
xxxxx के xxxx के द्वारा अपने पद में रहते हुये बिरला फैक्ट्री में करोडो रूपये का हेरफेर किया गया जिसकी जांच आज भी माननीय न्यायालय में लंबित है ।
xxxxx के द्वारा अपने आप को समाजवादी पार्टी के नेता कहलाने वाले xxxxxx के साथ मिलकर आजकल फर्जी जमीन का कारोबार किया जा रहा है , इसी तरह की एक जमीन सतना नदी पुल के बगल में है जिसकी रजीस्ट्री पूर्व में ही किसी के नाम से है बाद में फर्जी तरीके से इसी जमीन की रजीस्ट्री राजनैतिक व मिडिया की धांैस जमाकर अपने साथियो के नाम पर करा दी गई ।
xxxxx के तथाकथित पार्टनर xxxxxx के द्वारा फर्जी मार्कसीट व फर्जी दस्तावेजो के आधार पर सुबोध मेनन जो कि मूलतः महाराष्ट्र (मुंबई) का रहने वाला है का पिस्टल का लाइसेंस असंवैधानिक तरीके से बनवाया गया ।
xxxxx के द्वारा पूर्व में अस्था बी.एड. कालेज के मालिक को किडनैप करवाकर उसके साथ मारपीट कर उससे कालेज की संपत्ति व कालेज को अपने हितग्राहियो के नाम करवाया गया ।
एक शुभौक्षुक
Friday, March 2, 2012
प्रिज्म सीमेन्ट का सेलो गिरा, यूनिट २ का काम ठप
सतना के रामपुर बाघेलान के समीप मनकहरी स्थित प्रिज्म सीमेन्ट कंपनी को लंबा नुकसान झेलना पड़ा है। इन नुकसान के साथ ही कंपनी की यूनिट क्रमांक 2 का कामकाज भी ठप हो गया है जो अगले 6 महीने तक बंद ही रहेगा। इस घटना से कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ है। 6 माह तक उत्पादन न होने से अप्रत्यक्ष रूप से और करोड़ों की हानि हुई है। इससे पहले भी यह सेलो निर्माण के समय गिर गया था और तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद शुरू हुए निर्माण के बाद तकनीकि खामी रह गई थी। 2 मार्च को यहां काम चल रहा था कि दोपहर अचानक सेलो में दरारें आनी शुरु हो गई। हालात नाजुक होते देख कंपनी प्रबंधन सकते में आ गया। इसी दौरान सेलो के गिरे मलबे से 3 लोगों के घायल होने की खबर है।
शुरुआत में 18 हजार टन वजनी सेलो पीसा की झुकी हुई मीनार की तरह झुका हुआ था। हालात देखते हुए कंपनी ने यहां से लोगों को हटा लिये। देर रात 12 बजे के लगभग पूरा सेलो भरभरा का गिर गया। इस दौरान कोई जन हानि नहीं हुई है। लेकिन जो 4 लोग शुरुआती दौर में घायल हुए हैं वे कहां है और किस हाल में इसकी जानकारी को छुपाने लंबा मैनेजमेंट किया जा रहा है। अखबारों और न्यूज चैनलों में भी खरीद फरोख्त हुई है।
बिकाऊ हुई सतना की पत्रकारिता
सतना शहर का मीडिया बिक चुका है इसका प्रमाण इस घटना से मिल रहा है। चंद रुपयों के खातिर अपना जमीर बेचने वाले पत्रकार और प्रबंधन इतने भी नीचे चले जायेंगे यह शायद सतना में ही होता है। हद तो तब हो गई कि चंद नोटों के नीचे आकर इन लोगों ने खबर की खबर को हजम कर लिया। जबकि खबर तो दी जा सकती थी। बहरहाल मरे मीडिया जगत में इसी लिये तो उनकी औकात कुत्तों की तरह होती जा रही है कि जो भी आता है दो रोटी डाल देता है या फिर ज्यादा भोंके तो मार देता है। बनो कुत्ते...
Sunday, February 26, 2012
धन्यवाद भास्कर, जन सरोकार के लिये
इन दिनों सतना शहर में सीमेन्टेड सड़कों के उपर
डामर बिछाया जा रहा है। दो तीन साल पहले 20 साल की गारंटी पर नगर निगम द्वारा
बनवाई गई इस सीमेन्ट-कांक्रीट सड़कों की हालत अभी बेहतर है लेकिन इसके उपर एक बार
फिर से डामर बिछाने को महज पैसे का दुरुपयोग ही माना जा सकता है वह भी तब जब शहर
की आधे से ज्यादा सड़कों को अभी पक्का या डामरीकृत होने का इंतजार है। लेकिन कुछ
ठेकेदार व महापौर की मिलीभगत से हो रहे इन कामों को दैनिक भास्कर ने जिस तरीके से
सामने लाने का साहस किया है उससे यह तो अब साबित होने लगा है कि यह अखबार सतना शहर
के जन सरोकारों का सही हितैषी है। नारेबाजी में अपने आपको जन सरोकारी कहने वालों
की चुप्पी पर जनता की नजर तो है ही लेकिन अब शहर की जनता को भास्कर से ही आशा है
कि शायद वह बाईपास शहर वासियों को दिला सकेगा।
शहर की जनता ने जिस तरीके से पुष्कर सिंह तोमर को महापौर के रूप में देखा था अब वही जनता इन दिनों नगर निगम में होने वाले कामों से आजिज नजर आ रही है। कागजी व दिखावे के विकास में ज्यादा रुचि दिखाने के कारण महापौर की शहर वासियों के बीच उनकी निगेटिव छवि बन रही है।
Friday, February 24, 2012
विश्वतारा दूसरे ने स्टार समाचार में दी आमद
Tuesday, February 21, 2012
देवेन्द्र नगर में गिरफ्तार हुआ पत्रकार का बेटा
अपने साथियों के साथ खजुराहों से लौट रहे नई दुनिया के पत्रकार के बेटे को देवेन्द्रनगर में रुकना तब महंगा पड़ गया जब उनकी हरकतों की वजह से स्थानीय पुलिस ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया। अपने साथियों के साथ खजुराहों की रंगीनियत देखने के बाद वापस लौट रहे थे तो नशे में ये लोग देवेन्द्रनगर में रुक गये। यहां इन्होंने जो भी किया हो उसकी सूचना जब पुलिस को मिली तो पुलिस ने पत्रकार पुत्र सहित सभी साथियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में पत्रकारीय रिश्तों की बदौलत पुलिस इन्हे छोड़ा है। देवेन्द्रनगर रेड लाइट एरिया(बेड़िनियों) के रूप में कुख्यात है।
Friday, February 17, 2012
दैनिक भास्कर के मालिकाना विवाद में अजय अग्रवाल कोर्ट पहुंचे
दैनिक भास्कर के खिलाफ प्रकाशन और मालिकाना हक से संबंधित फर्जी घोषणापत्र के मामले में १५ फरवरी बुधवार को न्यायालय में सुनवाई हुई।पिछली सुनवाई के दौरान प्रकरण से संबंधित मूल दस्तावेज पेश नहीं किये गये थे। इस पर न्यायालय ने दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपि सौपने के निर्देश दिये थे। इस सुनवाई में सतना से अजय अग्रवाल भी शामिल हुए हैं।
घोषणा पत्र के मामले में जबलपुर के पूर्व कलेक्टर भागीरथ प्रसाद की ओर से जारी आदेश और रिकार्ड के मूल दस्तावेज न्यायालय में पेश किये जाने है। लेकिन इसकी मूल फाइल नहीं मिल रही।
भोपाल के अजय झा तथा कलिनायक के प्रकाशक संजीव जैन व प्रेम जैन ने ११ नवंबर को प्रेस रजिस्ट्रेशन एवं बुक एक्ट १८६७ की धारा ८बी के तहत दैनिक भास्कर के प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल, संचालक अजय अग्रवाल, सीएमडी कैलाश अग्रवाल, संचालक राकेश अग्रवाल तथा प्रकाश अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट में आवेदन पेश किया था। जिसमें दैनिक भास्कर के घोषणा पत्रों को निरस्त करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने २५ नवंबर को जिला दण्डाधिकारी को मामले का आठ माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिये है। इसी आदेश के आधार पर यह कार्यवाही चल रही है।
घोषणा पत्र के मामले में जबलपुर के पूर्व कलेक्टर भागीरथ प्रसाद की ओर से जारी आदेश और रिकार्ड के मूल दस्तावेज न्यायालय में पेश किये जाने है। लेकिन इसकी मूल फाइल नहीं मिल रही।
भोपाल के अजय झा तथा कलिनायक के प्रकाशक संजीव जैन व प्रेम जैन ने ११ नवंबर को प्रेस रजिस्ट्रेशन एवं बुक एक्ट १८६७ की धारा ८बी के तहत दैनिक भास्कर के प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल, संचालक अजय अग्रवाल, सीएमडी कैलाश अग्रवाल, संचालक राकेश अग्रवाल तथा प्रकाश अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट में आवेदन पेश किया था। जिसमें दैनिक भास्कर के घोषणा पत्रों को निरस्त करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने २५ नवंबर को जिला दण्डाधिकारी को मामले का आठ माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिये है। इसी आदेश के आधार पर यह कार्यवाही चल रही है।
Tuesday, February 7, 2012
स्टार समाचार, नगर निगम और रिपोर्टर का ठेका
जिले में स्टार समाचार ने आते ही जिस तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है वह न केवल अखबार की बेहतर नीति रीति का नतीजा है लेकिन इसके पीछे भी एक और नीति चली वह रही है यहां के कुछ लोगों की स्व-महत्वाकांक्षा। अखबार के कंधे पर बंदूक रखकर अपना हित साधने वालों ने दिखाने के लिये तो अखबार का फायदा किया लेकिन हकीकत कुछ और रही है। नगर निगम के मुखपृष्ट बने स्टार समाचार की बात पोस्टमार्टम पहले ही कर चुका है विगत दिवस सेमरिया एक्सप्रेस ने भी इसके रिपोर्टर की तथाकथा उजागर की है। स्टार समाचार के रिपोर्टर महेन्द्र पाण्डेय स्टार समाचार के नाम से कमाई करने में जुटे हैं। इंजीनियरों
राज एक्सप्रेस से तीन साल पहले पत्रकारिता में आने वाले महेन्द्र ने अखबार को अपनी कमाई का जरिया बनाया जो आज भी जारी है।
पत्रकारिता के दम पर अपनी रामकहानी लिखने वाले पत्रकारों में एसा ही एक दूसरा नाम संजय लोहानी का है। जब ये सतना आये थे तो इनकी स्थिति क्या थी किसी से नहीं छिपी है। लेकिन पत्रकारिता की ब्लैकमेलिंग से इन्होंने यहां अपना काला कारोबार शुरू किया और आज जमीन के धंधे के साथ ट्रक संचालन में जुटे हैं। पत्रकारिता की आड़ में मैहर सीमेन्ट में इन्होंने अपने ट्रक लगा रखे हैं। इसी तरह सतना सीमेन्ट में भी
इन्होंने काफी प्रयास किया था लेकिन सफल न होने पर इन्होंने यहां की काफी खबर दिखाई थी।
Thursday, October 27, 2011
बिरला सीमेन्ट और ननि पर विजिलेंस का छापा
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